Gurugram

1947 के विभाजन का दर्द, बुजुर्गों की जुबानी – ओ पी बंधु

op bandhu, 1947

Viral Sach – गुरुग्राम : सन् 1947 के बाद गदर की कहानी मेरे पिताजी की जुबानी, जो उन्होंने अपने दास्ताँ मुझे बताई | मेरे लाला जी श्री जगदीश चन्द्र पुत्र श्री केवल राम के तीन बेटें और दो बेटियां थी | सभी विवाहित थे, हम सब गाँव विन्डो, तहसील तौंसा, जिला डेरा गाजी खान में रहते थे | अच्छी जमीन जायदाद थी |

मैं पटवार पास करने के बाद पटवारी की नौकरी के पद पर कार्यरत था | मैंने यही मियार खान में पटवारगीरी का काम नवाब साहब के बंगले में काम करता था | लाला जी अपने अपने पूरे परिवार के लिए एक मकान ख़रीदा और उन्हें यही मियार खान में बुलवा लिया | लाला जी ने अपने भाई वासदेव, दादा केवल राम को दुकान ले दी और वह परचून और कपास का काम करने लगे |

लाला जी के एक दोस्त थे उनका नाम लाला लेखराज जो घड़ियों का काम करते थे | उनके पास अपने छोटे भाई साहब राम को उनके पास काम सिखाने के लिए बिठा दिया | काम सीखने के बाद उसे दुकान दे दी और उस्ताद के आशीर्वाद से अपना काम करने लगा | शहर के कुछ दोस्तों के साथ आर. एस. एस. की शाखा में जाना शुरू कर दिया |

साहब राम जी आर. एस. एस. और भारतीय जन संघ के कार्यकर्त्ता थे | नौजवान थे (उनकी एक घटना) कुछ मुसलमानों के लड़के गाय पकड़ कर ले जा रहे थे | यह अपने कुछ साथियों के साथ उनसे पूछा कि गाय को कहाँ ले जा रहे हो ? उत्तर मिला काटेंगे | चाचा साहब राम ने कहा पहले मेरे को काटो फिर इसे काटना | तनातनी के बीच लड़ाई हो गई | उनके कुछ मित्र भाग गये मुस्लिम लड़कों ने उन्हें पकड़ लिया और नवाब के बंगले में ले गये |

लाला जी को जब पता चला वह नवाब के बंगले में गये और कहा नवाब साहब यह मेरा छोटा भाई है | लाला जी के बताने पर नवाब ने कहा कि पटवारी जी, इसे कुछ दिनों के लिए यहाँ से बाहर भेज दो, नहीं तो यह मारा जाएगा | लाला जी ने उन्हें दुबारा विन्डी भेज दिया | कुछ दिनों के बाद फिर वापस आया और दुकान पर अपना काम करने लगा | सन् 1947 से पहले हिंदुस्तान में ब्रिटिश हुकुमत थी |

हमारे कुछ रणबांकुरे और उस समय के राजनेताओं में महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरु, बल्लभ भाई पटेल, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद, लियाकत अली, मोहम्मद अली जिन्ना और कुछ क्रांतिकारी नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, मदन लाल धींगडा, उधम सिंह कम्बोज इन लोगों ने हिंदुस्तान को आजाद कराया अपनी शहादत देकर |

अंग्रेज जाते – जाते “फूट डालो राज करो” की नीति का जहर घोल गये | फिर हिन्दुओं और मुसलमानों की लड़ाई शुरू हुई | हिंदुस्तान दो भागों में विभाजित हुआ और पाकिस्तान देश बना | मुल्सिम कट्टरपंथी लोगों ने हिन्दुओं पर जुल्म अत्याचार मारधाड़ शुरू कर दी | इस दुखदायी त्रासदी में लाखों की तादाद में नौजवान, बुजुर्ग, बहन-बेटियों, बच्चों को मौत के घाट उतार दिया |

लाला जी ने नवाब से गुहार लगाई जब नवाब साहब ने अपने कुछ बन्दों को हमारी रक्षा के लिए भेजा और वह रात्रि को हमें घर से निकाल कर हमारे परिवार को कराची तक पहुँचाया | लाला जी के पास दस हज़ार रूपये का चेक (इम्पीरियल बैंक, जोधपुर) नाम था | उस राशि के खर्च से हम कराची से पानी वाले जहाज में मुंबई पहुंचे | मुंबई से फिर दिल्ली पहुँच कर, कुछ दिन रहने के बाद हम गुड़गाँव आ गये | गौशाला ग्राउंड में टेंटों में कई परिवारों की रिहायश थी |

गुड़गाँव में जमीन अलाट मांडी खेडा में मिली | पूरा परिवार मांडी खेडा में जा बसा | लाला जी की नौकरी पलवल में लग गई | लाला जी, चाचा साहब राम फिर हमें गुड़गाँव ले आये | चाचा ने घड़ियों का काम शुरू कर दिया | लाला जी को दिल्ली में नियुक्ति मिल गई | पंजाब सरकार ने 40 वर्ग गज की कोठियां बनाई और हर परिवार को एक – एक कोठी अलाट हुई | जिसका नाम अर्जुन नगर है | अंत में लाला जी कहते थे भगवान की कृपा से हम हिंदुस्तान पहुंचे जब त्रासदी जो वहाँ हुई उसका नजारा सामने आता है जो हृदय कांप जाता है |

 

bombay Jewellers, 1947

Translated by Google 

Viral Sach – Gurugram: The story of Gadar after 1947 in the words of my father, which he told me his story. My Lalaji Shri Jagdish Chandra son of Shri Kewal Ram had three sons and two daughters. All were married, we all lived in Village Vindo, Tehsil Taunsa, District Dera Ghazi Khan. Had good land property.

I was working on the job post of Patwari after passing Patwar. I used to do the work of patwargiri in Miyar Khan in Nawab Saheb’s bungalow. Lala ji bought a house for his entire family and invited them to this Miyar Khan. Lala ji took his brother Vasdev, grandfather Keval Ram to the shop and he started doing grocery and cotton work.

Lala ji had a friend, his name was Lala Lekhraj who used to work for watches. He made his younger brother Ram sit beside him to teach him the work. After learning the work, he was given the shop and started doing his work with the blessings of the master. With some friends from the city. S. S. Started going to branch.

Sahib Ram ji R. S. S. And was a worker of Bharatiya Jana Sangh. There were youths (an incident of theirs) some Muslim boys were taking away the cow by holding it. He along with some of his companions asked him where are you taking the cow? Got the answer, will bite. Uncle Ram said first cut me then cut him. There was a fight between the tensions. Some of his friends ran away, the Muslim boys caught hold of them and took them to the Nawab’s bungalow.

When Lala ji came to know, he went to Nawab’s bungalow and said Nawab Sahib, this is my younger brother. On telling Lala ji, the Nawab said that Patwari ji, send him out of here for a few days, otherwise he will be killed. Lala ji sent him to Windy again. After a few days he came back again and started doing his work at the shop. Before 1947, there was British rule in India.

Some of our Ranbankure and politicians of that time include Mahatma Gandhi, Jawaharlal Nehru, Vallabh Bhai Patel, Maulana Abdul Kalam Azad, Liaquat Ali, Mohammad Ali Jinnah and some revolutionary leaders Subhash Chandra Bose, Chandrashekhar Azad, Bhagat Singh, Rajguru, Sukhdev, Madan Lal Dhingda, Udham Singh Kamboj, these people liberated India by giving their martyrdom.

While leaving, the British poisoned the policy of “divide and rule”. Then the fight between Hindus and Muslims started. Hindustan was divided into two parts and Pakistan became a country. Muslim fanatics started atrocities on Hindus. Lakhs of youth, elders, sisters-daughters, children were put to death in this tragic tragedy.

Lala ji pleaded with Nawab when Nawab Sahib sent some of his men to protect us and he took us out of the house at night and took our family to Karachi. Lala ji had a check of ten thousand rupees (Imperial Bank, Jodhpur) in his name. With the expense of that amount, we reached Mumbai in a ship from Karachi. After reaching Delhi again from Mumbai, after staying for a few days, we came to Gurgaon. Many families were living in tents in Gaushala Ground.

Got land in Gurgaon at Alat Mandi Kheda. The whole family settled in Mandi Kheda. Lala ji got job in Palwal. Lala ji, Chacha Sahib Ram again brought us to Gurgaon. Uncle started the business of watches. Lala ji got appointment in Delhi. The Punjab government made kothis of 40 square yards and each family was allotted one kothi. Whose name is Arjun Nagar. In the end, Lala ji used to say that by the grace of God, we reached India when the tragedy that happened there comes to the fore, which makes the heart tremble.

Follow us on Facebook 

Follow us on Youtube

Read More News 

Shares:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *