Gurugram

1947 के विभाजन का दर्द, बुजुर्गों की जुबानी – भागवंती डुडेजा

1947, India, Bhagwanti Dudeja

 

Viral Sach – 1947 – मेरा जन्म गाँव होदी बस्ती जिला डेरा गाजी खान (पाकिस्तान) में हुआ था | जब भारत-पाकिस्तान बना उस समय मेरी उम्र करीब 13 साल की थी | मेरी सगाई हो चुकी थी और जब अगस्त 1947 को मार-काट शुरू हुई तो उस समय मेरे पिताजी को मरे 3-4 साल हो गये थे |

मैं अपनी दादी और भाई के साथ थी | तो मेरी दादी ने मेरी शादी रस्ते में श्री गोपी नाथ के मंदिर में करवा दी थी | तो मैं अपने पति के साथ रेलगाड़ी में करनाल आ गई, वहाँ हम गाँव कुंजपुरा में टेंटों में 5-6 महिना रहे थे |

फिर वहाँ से हम गाँव गौछी तहसील बल्लभगढ़ आ गये जहाँ हमें एक मकान अलाट हुआ था | गाँव गौछी में मेरी चार लड़कियां और एक लड़का हुआ | फिर वहाँ से हम काम की तलाश में कैथल चले गये | कैथल में मेरे पति ने दुकानदारी कर के और मेहनत मजदूरी कर के बच्चों को पढ़ाया, लिखाया और उनकी शादियाँ की |

 

1947, India, Bhagwanti Dudeja

 

सन 1982 को मेरे पति का देहांत हो गया | मेरे पति की मृत्यु के बाद, मैंने अपने बेटे के साथ मिलकर दो बेटियों की शादी की | मेरे बेटे के दो लड़के यानि मेरे दो पोते है | उनकी भी शादी हो चुकी है | सन 2013 में, हम अपने पोतों के साथ गुड़गाँव आ गये है |

गुरु महाराज की कृपा से, अब मैं अपने बेटे, पोतों और पड़पोतों के साथ रह रही हूँ | भगवान् से प्रार्थना है कि जो नजारा, बंटवारे के समय मार-काट का देखा है, अब दोबारा ना देखना पड़े |

Translated by Google 

Viral Sach – 1947 – I was born in village Hodi Basti district Dera Ghazi Khan (Pakistan). I was about 13 years old when India-Pakistan was formed. I was engaged and when the killings started in August 1947, my father had been dead for 3-4 years at that time.

I was with my grandmother and brother. So my grandmother got me married on the way to Shri Gopi Nath’s temple. So I came to Karnal with my husband by train, there we stayed in tents in village Kunjpura for 5-6 months.

Then from there we came to village Gauchi Tehsil Ballabhgarh where we were allotted a house. I had four girls and one boy in village Gauchi. Then from there we went to Kaithal in search of work. In Kaithal, my husband worked as a shopkeeper and worked as a laborer, taught the children, wrote them and arranged their marriages.

My husband passed away in the year 1982. After the death of my husband, I married my two daughters together with my son. My son has two sons i.e. I have two grandsons. He is also married. In the year 2013, we have come to Gurgaon with our grandchildren.

By Guru Maharaj’s grace, I am now living with my son, grandsons and great-grandsons. I pray to God that the scene of carnage that I have seen at the time of partition, should not be seen again.

Follow us on Facebook 

Follow us on Youtube

Read More News 

Shares:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *