Gurugram

1947 के विभाजन का दर्द, बुजुर्गों की जुबानी – जोधा राम राजपाल

Jodha Ram Rajpal, 1947

Viral Sach – गुरुग्राम : 1947 – मेरी आयु उस समय मात्र 15 वर्ष थी जब हम गुलामी की जंजीरों से छूटकर स्वतंत्र भारत के नागरिक बने | आजादी की हवा में आजाद साँस लेने के लिए हमने और हमारे पूर्वजों ने कई कुर्बानियां दी | हमने पुरुषार्थ करके अपनी जिंदगी गुजारी |

यहाँ तक कि जिस समय हम लोग मेहनत – मजदूरी कर रहे थे, उस समय हमने अपने साथ के लोगों को म्युनिसिपल कमेटी की नालियां तक साफ करके भी अपने परिवार का भरण-पोषण करते हुए देखा परन्तु हमने हमारा चरित्र तबाह नहीं होने दिया |

उस समय कुछ स्वार्थी लोग इंसानियत के भेड़िये बने हुए थे | जिसका बदला उन्हें हमने हमारी कौम से बाहर करके दिया | आजकल मीडिया पर ख़बरें सुनते और पढ़ते है तो देखते है कि आज देश के हालात क्या से क्या हो गये है |

इस इन्सान जो उस समय हमने, अपने सामने देखा जिसका नाम अल्लाह बख्श था जो ख़ुदा का फ़क़ीर था जो मेरे पिताजी का मित्र था उसके घर पहाड़ी रास्ते पर था जो मुसाफिर लोग वहाँ पर आकर रुकते थे और लगभग 40-50 लोग रोज के घर खाना खाते थे और जिस दिन उसके घर कोई खाना नहीं खाता था उस दिन वह खाना नहीं खाता था |

जिस दिन उसके घर कोई नहीं आता था तो उस दिन वह कहता था कि आज ख़ुदा की रहमत नहीं हुई | जिस देश में बेटी को बेटी समझा जाता था |

आज उस देश में दरिन्दे पैदा हो गये है कहने को तो बड़े-बड़े जागरण करेंगे “जय माता की” “जय माता की” करते है लेकिन घर पर जिस माँ ने पैदा किया उसको पानी तक नहीं पूछते :
कुबूल होती न उनकी ईबादत कही,
जिक्रे ख़ुदा तो है, पर खौफे ख़ुदा नहीं,
यहाँ तक कि आजकल रिश्ते भी नाम के रह गये है | जो रिश्तों में जज्बात उस समय होते थे, आज नहीं हो सकते | हमें उस समय 50 बीघे की जगह 5 बीघे जमीन मिली, जो उस समय को कौड़ियों के भाव बेचनी पड़ी थी, जिसमें हमारी बिस्वेदारी भी समाप्त हो गई |

Translated by Google 

Viral Sach – Gurugram: 1947 – I was only 15 years old at that time when we got free from the chains of slavery and became citizens of independent India. We and our forefathers made many sacrifices to breathe freely in the air of freedom. We spent our life by making efforts.

Even when we were working as laborers, at that time we saw people with us maintaining their families even by cleaning the drains of the Municipal Committee, but we did not let our character get ruined.

At that time some selfish people had become wolves of humanity. For which we have repaid them by expelling them from our community. Nowadays, when we listen and read news on the media, then we see that what has become of the country’s condition today.

At that time we saw this person in front of us whose name was Allah Baksh who was a beggar of God who was a friend of my father. Used to eat and the day when no one eats food in his house, he did not eat food.

The day when no one used to come to his house, he used to say that today there was no mercy from God. In the country where daughter was considered as daughter.

Today, there will be big awareness to say that the beasts have been born in that country, they say “Jai Mata Ki”, “Jai Mata Ki”, but they don’t even ask the mother who gave birth to her at home:
His worship would not have been accepted,
There is mention of God, but there is no fear of God,
Even nowadays relationships have remained in name only. The feelings that used to be there in relationships at that time cannot be there today. At that time, instead of 50 bighas, we got 5 bighas of land, which at that time had to be sold for a pittance, in which our biswedari also ended.

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