Gurugram

1947 के विभाजन का दर्द, बुजुर्गों की जुबानी – कँवर भान मनचंदा

Kanwar Bhan Manchanda, 1947

 

गुरुग्राम : 1947 – मेरा नाम कँवर भान मनचंदा पुत्र स्वर्गीय लाला बोसा राम मनचंदा विभाजन से पूर्व निवास स्थान मकवल कलां तहसील तौंसा शरीफ जिला डेरा गाजी खान कमिश्नरी मुल्तान पाकिस्तान | मेरा जन्म 11.06.1938 को मकवल कलां में हुआ था | विभाजन से पूर्व मैं तीसरी क्लास में पढ़ता था और उर्दू पढ़ाई का माध्यम था |

विभाजन के समय मेरी आयु 8-9 साल की थी | मुझे केवल इतना याद है कि उन दिनों अफवाह फैलाई गई थी कि आज रात को गाँव में लुटेरे आयेंगे और हिन्दुओं को मार देंगे इसलिए रात होने से पहले सब हिन्दू बिना सामान लिए आज रात तो तौंसा तहसील से निकल जाओ, 2 दिन बाद वापस आ जाना | गाँव के सब हिन्दू रात होने से पहले तौंसा से भाग गये |

बिना सामान के सब हिन्दू निकल गये और 2 दिन तौंसा शरीफ में रहने के बाद अफवाह फैला दी गयी कि सब कुछ लूट ले गये और जो लोग रह गये उनको जान से मार दिया गया | भारत द्वारा भेजी गयी मिलिट्री हमें ट्रकों में भर कर डेरा गाजी खान रेलवे स्टेशन पर एक गाड़ी में बिठा कर चले गये, गाड़ी इन सब लोगों को लेकर भारत की तरफ रवाना हुई |रास्ते में कई स्टेशनों पर मुसलमान गुंडे गाड़ी रुकवाकर लोगों को उतारकर क़त्ल करने लगे |

परमात्मा की कृपा से हम बचकर हिसार स्टेशन पर उतार दिए गये | गवर्नमेंट कॉलेज के भवन में हमें 10 दिन रखकर वहाँ से गुडगाँव भेजा गया | गुडगाँव में रेलवे कैंप गौशाला कैंप में रखा गया | कुछ महीनों तक राशन मिलता वही खाते रहे | प्राइमरी स्कूल खोल दिए, वहाँ हम पांचवी तक पढ़े फिर छठी क्लास में हाई स्कूल में आ गये | मेरे दो बड़े भाई मेहनत मजदूरी करने लगे और कठिनाई से पेट पालने लगे |

कुछ समय बाद रेलवे कैंप और अर्जुन नगर में कच्ची कोठियां बना कर रिफ्यूजी बनकर रहने लगे | कम आयु होने के कारण मैंने अपनी आँखों से कोई क़त्ल नहीं देखा इसलिए बाकी कुछ नहीं जानता |

 

Tribhuvan, 1947

Translated by Google 

Gurugram : 1947 – My Name Kanwar Bhan Manchanda S/o Late Lala Bosa Ram Manchanda Residence Pre-Partition Makwal Kalan Tehsil Taunsa Sharif District Dera Ghazi Khan Commissionerate Multan Pakistan. I was born on 11.06.1938 at Maqwal Kalan. Before partition, I used to study in class III and Urdu was the medium of instruction.

I was 8-9 years old at the time of partition. I only remember that in those days a rumor was spread that robbers would come to the village tonight and kill Hindus, so before nightfall all Hindus leave Taunsa tehsil tonight without taking their belongings, come back after 2 days | All the Hindus of the village fled from Taunsa before nightfall.

All the Hindus left without belongings and after staying in Taunsa Sharif for 2 days, a rumor was spread that everything was looted and those who remained were killed. The military sent by India loaded us in trucks and left us in a car at Dera Ghazi Khan railway station, the car took all these people and left for India. Engaged |

By the grace of God, we were saved and dropped at Hisar station. After keeping us for 10 days in the Government College building, we were sent to Gurgaon. Railway camp in Gurgaon was kept in Gaushala camp. For a few months, they used to eat the same ration they got. Primary school was opened, there we studied till fifth standard and then came to high school in sixth standard. My two elder brothers started working hard as laborers and started feeding with difficulty.

After some time, in the railway camp and Arjun Nagar, they started living as refugees by making kutchi kothis. Due to my young age, I did not see any murder with my own eyes, so I do not know anything else.

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