माननीय उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से खतम हुई 6 साल पुरानी जाति आधारित वार्डबंदी

Annu Advt

चंडीगढ़, (ब्यूरो ) : जटौला गांव (सोनीपत) के निवासी करतार सिंह बज्जर ने अपने वकील सुनील रंगा के माध्यम से अपने गांव जटौला में की गई जाति आधारित वार्डबंदी को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। जोकि पूरी तरह संविधान के खिलाफ थी और मूलभूत अधिकारों 14, 15, 17 और 21 का हनन करती थी।

अधिवक्ता सुनील रंगा ने जाकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव के समय हरियाणा सरकार ने जटौला गांव (सोनीपत) में जाति को आधार बनाकर पिछड़ी जतियों, अनुसचित जातियों और सामन्य जातियों के लिए अलग-अलग वार्ड बना दिए थे और इसी वार्डबंदी पर 2015 के पंचायत चुनाव भी करवाए गए। जोकि पूर्णतया गैर कानूनी और असंवैधानिक है। क्योंकि हरियाणा पंचायती राज चुनाव नियम 4 के अनुसार वार्डबंदी “Compactness of houses on ground” मतलब मकान नंबर के हिसाब से होनी चाहिए और संविधान के अनुच्छेद 15 के अनुसार किसी से भी जाति के आधार पर भेदभाव नही किया जा सकता और अनुच्छेद 17 के अन्तर्गत अस्पृश्यता खत्म की जा चुकी है यह किसी भी रुप में निषिद्घ है।

शुक्रवार को माननीय उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा के सरकार जटौला गांव (सोनीपत) में नये सिरे से हरियाणा पंचायती राज चुनाव नियम 4 के अनुसार ही वार्डबंदी करेगी । और माननीय उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को ये भी स्वतंत्रता दी कि अगर वो ताजा वार्डबंदी से भी पीड़ित है तो वह उक्त वार्डबंदी को भी चुनौती दे सकता है।

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