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Bodhraj Sikri – प्रभु श्रीराम का आदर्श जीवन मानव जीवन के लिए प्रेरणापुंज

bodhraj sikri

 

Viral Sach : Bodhraj Sikri  – स्वामी दिव्यानंद महाराज के पावन और पवित्र आश्रम जोकि ज्योति पार्क गुरुग्राम में स्थित है, स्वामी जी द्वारा बोधराज सीकरी को परसो आग्रह किया कि ये जो हनुमान चालीसा के पाठ की मुहिम आपने शुरू की है उसका आनंद बहुत सारे साधकों ने लिया और बहुत सारे साधक इस आनंद से वंचित रह गए हैं और वो आने वाले अंतिम दिन यानी सत्संग का जो चौथा दिन है उसमें भी आनंद के लिए आएंगे व पुनः यह कार्यक्रम आयोजित किया जाए।

उसके परिणामस्वरूप कल आश्रम में लगभग 800 साधकों ने पहले तो एक घंटा स्वामी जी के प्रवचन का आनंद लिया और ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाई। उसके उपरांत हनुमान चालीसा के पाठ का पठन किया गया।

स्वामी जी ने अपने वक्तव्य में बताया साधक को जिज्ञासा होनी चाहिए, साधक का जीवन एक दर्पण की तरह होना चाहिए ताकि उसको दर्पण अपनी सच्चाई बता सके। व्यक्ति को अपने मन की स्थिति भी मालूम होनी चाहिए। किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से तुलनात्मक दृष्टिकोण से मुकाबला नहीं करना चाहिए नहीं तो जीवन में गड़बड़ी होती है।

व्यक्ति को समयक श्रोता बनना चाहिए। उनके अनुसार कथा से अपराध बोध के दर्शन होते हैं। उन्होंने आगे बताया कि राज दशरथ के मन की स्थिति मृत्यु के समय क्या थी उसके मन के ऊपर एक उस दर्पण का दृश्य नजर आ रहा था जब श्रवण कुमार के माता-पिता ने उन्हें श्राप दिया था।

इस प्रकार स्वामीजी ने बताया कि आज के कई नेता संपत्ति और सुविधाएं नागरिकों को देने में लगे हैं। इस प्रकार की संपत्ति और सुविधाएं मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी दिया करते थे परंतु मर्यादा पुरुषोत्तम राम उसके साथ संस्कार और कर्तव्यपरायणता भी अपने नागरिकों को और प्रजा को सिखाते थे।

दुर्भाग्य की बात है कि आज का नेता ये सुविधाएं तो उन्हें दे रहा है परन्तु उन्हें संस्कारविहीन और कर्तव्यपरायणता विहीन बना रहा है जिसके कारण नागरिक आलसी बनता है।

 

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महाराज जी ने अपने वक्तव्य में बताया कि व्यक्ति को जब किसी भी कथा या आयोजन में सम्मिलित होना हो तो ना केवल वो सुनें बल्कि उस विषय का अध्ययन करें, स्वाध्ययन करें, समीक्षा करें, मंथन करें और फिर चिंतन करें। इस प्रकार वो विषय उसके मन के पटल पर बैठ जाएगा।

महाराज श्री ने हनुमान चालीसा के ऐसे-ऐसे रहस्य उजागर किये जो पहले कभी नहीं सुने थे। उन्होंने प्रारम्भ में एक बार हनुमान चालीसा पाठ का संगीतमय तरीके से स्वयं गायन किया और फिर बोधराज सीकरी के मित्र गजेंद्र गोसाई जो निरंतर पिछले तीन महीनों से हनुमान चालीसा के पाठ को अपने सुर और स्वरों का एक नया रूप दे रहे हैं उसके माध्यम से उन्हें कहा कि अब आप संगीतमय तरीके से हनुमान चालीसा का पाठ करें।

गजेंद्र गोसाई ने अपने मुखारबिंद से अपने मधुर वाणी से 8 बार संगीतमय तरीके से पाठ किया। तदोपरांत अंत के दो पाठ स्वामी दिव्यानंद महाराज ने अपने मुखारबिंद से गाए और उसमें लोगों को प्रेरित किया कि नृत्य भी साथ में करेंगे।

आखिरी दो हनुमान चालीसा पाठ का पठन संगीतमय तरीके से उसमें लगभग 800 साधकों को डांडिया दिया गया और डांडिया के माध्यम से गायकी के माध्यम से साथ में भजन और गुरुदेव के नए-नए शब्दों का मिश्रण करके हनुमान चालीसा पाठ के साथ-साथ नृत्य का दृश्य देखने के लायक था।

उसके उपरांत बोधराज सीकरी से कहा गया कि वे समापन की और आगे बढ़ें। बोधराज सीकरी ने अपने वक्तव्य में स्वामी जी का जहां एक और आभार प्रकट किया क्योंकि उन्होंने लोगों को दो दिन निरंतर हनुमान चालीसा के पाठ का संगीतमय तरीके से पठन करने का अवसर प्रदान किया।

बोधराज सीकरी ने बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम न केवल राक्षसों का वध करने के लिए बल्कि पर्यावरण को संतुलित करने के लिए उन्होंने जन्म लिया। क्योंकि उन्होंने बहुत ही सुंदर कविता पढ़कर सुनाई जिसमें पृथ्वी माँ भगवान विष्णु के पास हाहाकार करती हुई जाती है और राक्षसों के द्वारा किये गए अत्याचार के बारे में बताती है। तो भगवान विष्णु से उन्हें क्या उत्तर दिया :

पृथ्वी ए मेरी प्यारी पृथ्वी,
मैं तेरा ताप मिटाता हूँ (यहां ताप का अभिप्राय ग्लोबल वार्मिंग से है)
पृथ्वी ए मेरी प्यारी पृथ्वी
मैं तेरा ताप मिटाता हूँ।
दशरथ के यहां राम बनकर
अतिशीघ्र अवध में आता हूँ l
भक्तों अब तुम निश्चिंत रहो
अब तुम्हें ना कोई भय होगा। यह धरणी होगी धरा धाम, धरणी धर का अभिनय होगा l
सुन सकते नहीं कान मेरे अत्याधिक पुकार अधीनों की, ये पृथ्वी होगी वीरों की
पृथ्वी न होगी हीनों की l

इस प्रकार अपने मन के उद्गार रखे और अंत मे वेद के एक मंत्र जो यज्ञ करते समय प्रायः 5 बार उच्चारित किया जाता है। इसमें प्रजा और पशु दो शब्दों का वर्णन है। प्रजा का अभिप्राय संतान से और पशु का अभिप्राय हमारी गौमाता से है।

इस प्रकार उस मंत्र की भी बोधराज सीकरी ने सकुशल व्याख्या करी और अंत में महाराज श्री के चरणों में नतमस्तक हो उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया। उसके बाद प्रसाद वितरित किया गया।

इस कार्यक्रम में धर्मेंद्र बजाज, ज्योत्सना बजाज, रचना बजाज, शशि बजाज, राजेश गाबा(प्रधान गीता आश्रम), हरीश संगीतज्ञ, रमेश कुमार, ओ.पी कालरा, चंचल, रमेश कामरा,रामलाल ग्रोवर, एम.के अरोड़ा, हरविंद कोहली, ओमप्रकाश कथूरिया, चूनी लाल शर्मा, रमेश मुंजाल, द्वारका दास कक्कड़, पुनीत कथूरिया, नरेंद्र कथूरिया, राजपाल आहूजा, सुभाष ग्रोवर एडवोकेट व अन्य जन उपस्थित रहे।

आठ सौ लोगों ने दस-दस बार पाठ करके आठ हज़ार का आँकड़ा स्पर्श किया। पाठ की कुल संख्या कल तक 8000 रही। 172600 की पहले की संख्या कल की आठ हज़ार से मिला कर 180600 को छूँ गई।

Translated by Google 

Viral Sach: Swami Divyanand Maharaj’s holy ashram, which is located in Jyoti Park Gurugram, the day before yesterday Swami ji urged Bodhraj Sikri that the campaign of recitation of Hanuman Chalisa started by you was enjoyed by many sadhaks and many All the sadhaks have been deprived of this joy and they will come for joy on the coming last day i.e. the fourth day of the satsang and this program should be organized again.

As a result, yesterday in the ashram, about 800 devotees first enjoyed Swamiji’s discourse for one hour and took a dip in the Ganges of knowledge. After that the text of Hanuman Chalisa was read.

Swami ji told in his statement that the seeker should have curiosity, the life of the seeker should be like a mirror so that the mirror can tell him its truth. One should also know the state of his mind. A person should not compete with another person from a comparative point of view, otherwise there is disturbance in life.

One should become an avid listener. According to him, there is a vision of guilt from the story. He further told that what was the state of mind of Raj Dasaratha at the time of his death. Above his mind was a view of that mirror when Shravan Kumar’s parents had cursed him.

Thus Swamiji pointed out that many of today’s leaders are engaged in giving away wealth and facilities to the citizens. Maryada Purushottam Ram also used to give such wealth and facilities, but Maryada Purushottam Ram used to teach rituals and dutifulness along with it to his citizens and subjects.

It is unfortunate that today’s leader is giving these facilities to them but is making them cultureless and dutiful, due to which the citizen becomes lazy.

Maharaj ji told in his statement that when a person wants to participate in any story or event, he should not only listen to it but also study that subject, do self-study, review, brainstorm and then think. In this way that subject will sit on the table of his mind.

Maharaj Shree revealed such secrets of Hanuman Chalisa which were never heard before. In the beginning he sang Hanuman Chalisa recitation once in a musical way himself and then told him through Bodhraj Sikri’s friend Gajendra Gosai who has been continuously giving a new form to the recitation of Hanuman Chalisa for the last three months in his sur and swars. That now you recite Hanuman Chalisa in a musical way.

Gajendra Gosai recited musically 8 times in his melodious voice from his Mukharabind. After that Swami Divyanand Maharaj sang the last two recitations with his mouthpiece and inspired the people to dance together.

The reading of the last two Hanuman Chalisa recitations in a musical way, Dandiya was given to about 800 sadhaks and dance scene along with Hanuman Chalisa recitation by mixing bhajans and Gurudev’s new words through singing through Dandiya was worth seeing.

After that Bodhraj Sikri was told to proceed towards the conclusion. Bodhraj Sikri in his statement expressed another gratitude to Swami ji as he provided people with an opportunity to recite the text of Hanuman Chalisa in a musical way for two days continuously.

Bodhraj Sikri told that Maryada Purushottam Ram was born not only to kill the demons but also to balance the environment. Because he recited a very beautiful poem in which Mother Earth goes crying to Lord Vishnu and tells about the atrocities committed by the demons. So what answer did Lord Vishnu give to him:

Earth my dear earth,
Main Tera Tap Mitta Hoon (Here heat refers to global warming)
earth my dear earth
I remove your heat.
By becoming Ram at Dasaratha’s place
I will come to Awadh very soon.
you guys can rest easy
Now you will not have any fear. This land will be Dhara Dham, Dhar Dhar will be acting.
Can’t hear the loud call of my subordinates, this earth will belong to the heroes
The earth will not belong to the inferiors.

In this way, keep the utterances of your mind and at the end a mantra of Vedas which is often pronounced 5 times while performing Yagya. There is a description of the two words Praja and Pashu. Praja means children and animal means our mother cow.

In this way Bodhraj Sikri explained that mantra successfully and in the end bowed down at the feet of Maharaj Shri and received his blessings.
After that Prasad was distributed.

Dharmendra Bajaj, Jyotsna Bajaj, Rachna Bajaj, Shashi Bajaj, Rajesh Gaba (Principal Geeta Ashram), Harish Sangeetgya, Ramesh Kumar, OP Kalra, Chanchal, Ramesh Kamra, Ramlal Grover, MK Arora, Harvind Kohli, Omprakash Kathuria, Chuni Lal Sharma, Ramesh Munjal, Dwarka Das Kakkar, Puneet Kathuria, Narendra Kathuria, Rajpal Ahuja, Subhash Grover Advocate and others were present.

Eight hundred people recited ten times each and touched the figure of eight thousand. The total number of lessons remained 8000 till yesterday. The earlier number of 172600 mixed with yesterday’s eight thousand touched 180600.

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