1962 के युद्ध के विरोध में भारत तिब्बत सहयोग मंच ने फूंका चीन का पुतला

1962

 

Viral Sach : भारत तिब्बत सहयोग मंच हरियाणा इकाई की ओर से गुरुवार को चीन द्वारा 20 अक्टूबर 1962 को भारत पर आक्रमण की 60वीं वर्षगांठ पर चीन के खिलाफ गुरुग्राम में विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान चीन का पुतला भी फूंका गया।

भारत तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय मंत्री प्रमोद गोयल की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन से पूर्व भारत तिब्बत सहयोग मंच के सदस्य शमा रेस्टोरेंट के निकट एकत्रित हुए। वहां से जुलूस निकालकर प्रदर्शन करते हुए डाकखाना चौक पर पहुंचे।

इस दौरान चीन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई। इससे पूर्व राष्ट्रीय मंत्री प्रमोद गोयल ने कहा कि भारत-चीन के बीच युद्ध से पहले हुई मुठभेड़ों की पूरी श्रृंखला के तहत वर्ष 1962 में थगला रिज पर हुआ चीनी कब्जा भी शामिल था, जिसके बाद भारत ने उन्हें वहां से बलपूर्वक हटाने के लिए ऑपरेशन लेगॉर्न शुरू किया। इस हमले में तीन भारतीय सैनिक घायल हो गए। इस घटना ने दोनों पक्षों के बीच सशस्त्र संघर्ष शुरुआत कर दी।

भारतीय और चीनी सैनिकों ने रुक-रुक एक दूसरे पर गोलाबारी की। श्री गोयल के मुताबिक 7 इन्फैंट्री ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर जॉन दलवी द्वारा तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार, भारतीय सेना को 10 अक्टूबर को ऑपरेशन लेगॉर्न शुरू करना था।

डी-डे पर 2 राजपूत रेजिमेंट के सैनिक नमका चू नदी के दक्षिणी किनारे पर, युमत्सो ला-एलएसी पर थगला रिज के पश्चिम में स्थित एक पहाड़ी दर्रा की ओर बढ़ रहे थे। तभी वे एक चीनी बटालियन की तरफ से की गई गोलाबारी की चपेट में आ गए। इसके बाद, त्सेंग-जोंग के आगे तैनात 9 पंजाब के सैनिकों पर भी चीनियों द्वारा मोर्टार की गोलाबारी से हमला किया गया। 20 अक्टूबर 1962 से लेकर 20 नवम्बर 1962 तक यह युद्ध चला।

मंच की हरियाणा प्रांत इकाई के अध्यक्ष अमित गोयल ने कहा कि इस युद्ध में भारत ने उन हमलों में अपने छह जवानों को खो दिया, जबकि 11 अन्य घायल हो गए और पांच जवान लापता हो गए। लगातार होते हमले और अरक्षणीय स्थिति को देखते हुए वापसी का आदेश दे दिया गया और चीनी सेना ने त्सेंग-जोंग पर कब्जा कर लिया।

उन्होंने कहा कि तिब्बत की आजादी, मानसरोवर की मुक्ति और भारत की सुरक्षा मंच का उद्देश्य है। जब तक इस उद्देश्य में कामयाबी नहीं मिलती, चीन के खिलाफ आक्रोष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी देशवासी समय-समय पर अपने देश के प्रति कृतज्ञता दिखाएं और चीन के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहें।

इस विरोध प्रदर्शन में जम्मू कश्मीर प्रदेश अध्यक्ष संजीव मनमोत्रा, हरियाणा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य वीरेंद्र, अजय जैन, उषा गुप्ता, शारदा शर्मा, गुरुग्राम जिला अध्यक्ष व बजरंग दल और गौ सेवक अभिषेक गौड़, अजय जैन, गिरीश सिंगला, युधिष्ठिर कौशिक, दीपक शर्मा, नवीन शर्मा (मोटू), सन्नी जांघू, राकेश, वैभव, नमन अग्रवाल, राजीव मित्तल, महाकर नागर, राजू बत्रा, संतोष शर्मा, प्रतीक राव, नमन गोयल और निशान्त अहलावत मौजूद रहे।

Translated by google 

Viral Sach: On Thursday, on behalf of the Indo-Tibetan Cooperation Forum, Haryana unit, a protest was held in Gurugram against China on the 60th anniversary of the Chinese invasion of India on October 20, 1962. During this, an effigy of China was also burnt.

Members of the Indo-Tibetan Cooperation Forum gathered near Shama restaurant before the protest led by National Minister of Indo-Tibetan Cooperation Forum, Pramod Goyal. Taking out a procession from there, they reached the Post Office Chowk while demonstrating.

During this, slogans were also raised against China. Earlier, National Minister Pramod Goyal said that the entire series of pre-war encounters between India and China included the Chinese occupation of Thagla Ridge in 1962, after which India launched Operation Leggorn to forcefully remove them from there. began. Three Indian soldiers were injured in this attack. The incident triggered an armed conflict between the two sides.

Indian and Chinese soldiers fired at each other intermittently. According to Mr Goel, as per the action plan prepared by Brigadier John Dalvi, Commander of 7 Infantry Brigade, the Indian Army was to launch Operation Leggorn on 10 October.

On D-Day, soldiers of the 2nd Rajput Regiment were advancing towards a mountain pass west of the Thagla ridge on the Yumtso La-lac, on the southern bank of the Namka Chu River. Then they came under shelling from a Chinese battalion. Subsequently, 9 Punjab soldiers stationed ahead of Tseng-jong were also attacked by mortar shelling by the Chinese. This war lasted from 20 October 1962 to 20 November 1962.

Amit Goel, president of the Manch’s Haryana province unit, said that in this war, India lost six of its soldiers in those attacks, while 11 others were injured and five soldiers went missing. In view of the continuous attack and the unsustainable situation, a withdrawal order was given and the Chinese army captured Tseng-jong.

He said that the independence of Tibet, the liberation of Mansarovar and the security of India are the aims of the forum. Unless this objective is successful, the resentment against China will continue. He said that all the countrymen should show their gratitude towards their country from time to time and keep raising their voice against China.

In this protest, Jammu and Kashmir State President Sanjeev Manmotra, Haryana State Executive Members Virendra, Ajay Jain, Usha Gupta, Sharda Sharma, Gurugram District President and Bajrang Dal and Gau Sevaks Abhishek Gaur, Ajay Jain, Girish Singla, Yudhishthira Kaushik, Deepak Sharma, Naveen Sharma (Motu), Sunny Janghu, Rakesh, Vaibhav, Naman Agarwal, Rajeev Mittal, Mahakar Nagar, Raju Batra, Santosh Sharma, Prateek Rao, Naman Goyal and Nishant Ahlawat were present.

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