Dera Sacha Sauda – जनवरी में सजता है मानवता का महाकुंभ

dera sacha sauda

 

Viral Sach – Dera Sacha Sauda – सरस्वती नदी की धारा के किनारे बसे सरस वन जिसे आधुनिक भारत सिरसा के नाम से जानता है। वेदों में संत, सरस्वती, साधना, सेवा, सहयोग, समर्पण, पुराण, उपनिषद की रचना के इस धरा को सरस वन के नाम से ही वर्णित किया गया है।

ज्ञान की देवी मां सरस्वती की साधना कर संसार को वरदान स्वरूप प्रकाश पुंज देने वाले मनीषियो, मानवता का उपकार करने वाले साधकों, समाज को सच की राह दिखाने वाले संतों और दुनिया में जाति पात ऊंच नीच गरीब अमीर की दीवार ढहा “मानस की एक जाति सभी जन एक है” की भावना के भवन को बसाने वाले बस आने वाले शाह मस्ताना जी ने इसी पावन धरा पर आपने गुरु सावन सिंह शाह के आदेश पर ब डेरा सच्चा सौदा धाम की नीव रखी,जो मानवता की मिशाल बन दुनिया रौशन कर रहा है।

सरस वन से सरसा फ़िर सिरसा और डेरा भक्तो के बीच शाह सतनाम की नगरी के रूप में विश्व विख्यात सिरसा में जनवरी माह में मानवता का महाकुंभ सजता है। इस पूरे जनवरी महीने में डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों सेवादार पूरे संसार में मानवता की सेवा में खुद को समर्पित कर अपने गुरु शाह सतनाम जी के अवतार मां को मानवता का महीना बना सर्वस्व निछावर करने का संकल्प लेते हैं।

सिरसा में देश के कोने-कोने और सात समुंदर पार से भक्तों की टोली डेरा सच्चा सौदा पहुंच गुरुदेव की चौखट चूम निहाल होती है।

दुनिया भर में डेरा सच्चा सौदा के सेवादार सेवा,समर्पण से मानवता को बचाने के लिए सबसे पहली कतार में शुमार है। ब्लड फैक्ट्री के नाम से भी जाना जाता है डेरा सच्चा सौदा को जहां भक्त खुशी खुशी गाते हैं “खून बिन जाने ना देंगे जिंदगी” लाखों श्रद्धालु प्रति तीन माह पर स्वेच्छा से नियमित रक्तदान कर खून की नदियां देश को अर्पित करते हैं जिससे जरूरतमंद की जिंदगी बचाई जा सके।

सालों साल भारतीय सेना को रक्त दाताओं की सूची में डेरा सच्चा सौदा सर्वोच्च स्थान पर काबिज रहा है। मां गंगा की दुर्दशा जब देखी नहीं गई तो हरिद्वार की हर की पौड़ी पर 15 लाख श्रद्धालुओं के साथ संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा ने डेरा डाल दिया, मां गंगा की धारा, हाट, घाट शहर की गंदगी को भक्तों ने अपने सिर पर रख पूरे के पूरे हरिद्वार को संवारा साफ किया, जिसका गवाह बना पूरा हिंदुस्तान।

उस पावन धरती से यह नारा भी फिजा में गूंजा “गंगा हमारी मां है तो, मां के मुंह में कूड़ा क्यों?” डेरा सच्चा सौदा सिरसा समाज का वरदान है, सेवा का संसार, मानवता का मंदिर, कुरीतियों को तोड़ने मानव को मानव से जोड़ने वाला वो दर है जिसने हर बेसहारा को सहारा दिया, हारे हुए की उम्मीद, हौसले की जीत डेरा सच्चा सौदा ने मे अनूठी मिसालो की लंबी कतार है, जिसमें वेश्याओं का कन्यादान, जीते जी किडनी दान, निसंतानों को पुत्र दान, विकलांग वर से बेटियों का शादी करना, बेटियों का अर्थी को कंधा देना और मां-बाप को मुखाग्नि देने की शुरुआत, जीते जी रक्तदान जाते-जाते नेत्रदान कुछ सेवादार तो यह भी शान से कहते हैं कि “लेकर नहीं कुछ वापस जाना यह शरीर भी दान है”।

ऐसी अद्भुत सेवा समर्पण की दुनिया, दुनिया भर में डेरा सच्चा सौदा के सिवाय कहीं मिल ही नहीं सकती।

डेरा सच्चा सौदा की नीव ड़ाल शाह मस्ताना जी ने संसार को मानवता का मंदिर दिया। शाह मस्ताना जी ने अपने जीवन का रूप स्वरूप शक्ति खुद अपने शिष्य शाह सतनाम जी दाता को सौंप एकरूप हो गए, गुरु से भक्ति भक्ति शक्ति अर्जित कर खुद खुदा का नूर बन शाह सतनाम जी ने डेरा सच्चा सौदा के दायरे को बढ़ाया।

जनवरी माह उनका अवतार महीना है जिसे परोपकार महीने के रूप में पूरी दुनिया में फैले डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायी धूमधाम से मनाते हैं,और मानवता की नगरी सिरसा में मानव का महाकुंभ सजाते है, जिसकी छटा, जिसका रूप, इसकी भाव, जिसकी भावना, इसका भरोसा अकथनीय,अकल्पनीय, अवर्णनीय लगता है।

पावनता, मानवता, भावना और समर्पण का सर्वोच्च धाम डेरा सचा सौदा मानव कल्याण में समर्पित वह मंदिर है जहां खुशी, हंसी, उम्मीद,भरोसा, सहयोग पल पल आपका साथ निभाने को आतुर दिखते हैं।

राहत,चाहत करूंणा के इस महा समंदर की हर लहर संसार के हर कहर को मिटाने के लिये काफी है।सन्तो की इस धरा,मा सरस्वती की धारा,वेदो जाए रचना की जमी उपनिशदो की धरती को शत शत नमन। निकालिये समय और समा जाइये मानवता के इस महाकुंभ सिरसा मे।

Translated by Google 

Viral Sach – Dera Sacha Sauda – The Saras forest situated on the banks of the river Saraswati, which modern India knows as Sirsa. In the Vedas, this land of creation of Saint, Saraswati, Sadhana, Service, Cooperation, Dedication, Puranas, Upanishads has been described by the name of Saras Van.

Sages who blessed the world with a beam of light by worshiping Mother Saraswati, the goddess of knowledge, seekers who benefit humanity, saints who show the path of truth to the society and in the world the wall of caste, high and low, poor and rich has collapsed. Shah Mastana ji, who just came to settle the building of the spirit of “All people are one”, on this holy land, you laid the foundation of Badera Sacha Sauda Dham on the order of Guru Sawan Singh Shah, which is illuminating the world by becoming an example of humanity. .

From Saras Van to Sarsa then Sirsa and Dera devotees in the world famous Sirsa as the city of Shah Satnam, Mahakumbh of humanity is decorated in the month of January. In this entire month of January, crores of Dera Sacha Sauda volunteers all over the world dedicated themselves to the service of humanity, to the incarnation of their Guru Shah Satnam Ji.
Make it a month of humanity and take a pledge to sacrifice everything.

In Sirsa, a group of devotees from every corner of the country and across the seven seas reach Dera Sacha Sauda and kiss the doorstep of Gurudev.

The servants of Dera Sacha Sauda all over the world are in the first line to save humanity through service, dedication. Dera Sacha Sauda, also known as Blood Factory, where devotees happily sing “Khoon Bin Jaane Na Denge Zindagi”, lakhs of devotees voluntarily donate blood regularly every three months and offer rivers of blood to the country, thereby saving the lives of the needy. Can be saved

Dera Sacha Sauda has been occupying the top position in the list of blood donors to the Indian Army for years. When the plight of Maa Ganga was not seen, Saint Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insa along with 1.5 million devotees camped at Har Ki Pauri in Haridwar. The whole of Haridwar was beautified and cleaned, of which the whole of India became a witness.

This slogan also echoed in Fiza from that holy land, “Ganga is our mother, so why is there garbage in the mother’s mouth?” Dera Sacha Sauda Sirsa is the boon of the society, the world of service, the temple of humanity, the one who connects human to human to break the evils, the one who supported every destitute, the hope of the loser, the victory of courage is unique in Dera Sacha Sauda. There is a long line of precedents, in which the donation of daughters of prostitutes, kidney donation while alive, son donation to the childless, marriage of daughters to handicapped grooms, giving shoulder to the bier of daughters and the beginning of giving fire to the parents, blood donation goes while alive- While donating eyes, some sevadars also proudly say that “going back without taking anything, this body is also a donation”.

The world of such amazing service dedication cannot be found anywhere in the world except Dera Sacha Sauda.

Shah Mastana ji, who laid the foundation of Dera Sacha Sauda, gave the temple of humanity to the world. Shah Mastana ji himself became united by handing over the power of his life to his disciple Shah Satnam ji the giver, Shah Satnam ji increased the scope of Dera Sacha Sauda by becoming the light of God himself by earning devotional power from Guru.

The month of January is his incarnation month, which is celebrated with great fanfare by crores of followers of Dera Sacha Sauda spread all over the world as the month of charity, and in the city of humanity, Sirsa, decorates the Mahakumbh of Manav, whose shade, whose form, its spirit, whose spirit , Its trust seems inexplicable, unimaginable, indescribable.

Dera Sacha Sauda, the supreme abode of purity, humanity, emotion and dedication, is a temple dedicated to human welfare, where happiness, laughter, hope, trust, cooperation are eager to be with you every moment.

Every wave of this great ocean of relief, love and compassion is enough to erase every havoc of the world. Hundreds of salutations to this land of saints, the stream of Mother Saraswati, the land of Upanishads, the creation of Vedas. Take out time and get absorbed in this Mahakumbh of humanity, Sirsa.

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