गुरुग्राम ज़िला के 7 हाईरिस्क क्षेत्रों का जिला प्रशासन ने तैयार किया एक्शन प्लाॅन

गुरूग्राम, (प्रवीन कुमार ) : गुरुग्राम ज़िला के ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा 7 हाई रिस्क क्षेत्रों का एक्शन प्लान बनाते हुए सघन टेस्टिंग अभियान चलाया जा रहा है ताकि कोरोना संक्रमित मरीजों की जल्द से जल्द से पहचान कर उन्हें आइसोलेट करते हुए उनका ईलाज किया जा सके।

इस बारे में जानकारी देते हुए उपायुक्त डा. यश गर्ग ने बताया कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने अब धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में जरूरी है कि 3टी- टेस्टिंग , ट्रेसिंग व ट्रीटमेंट पर फोकस करते हुए कार्य योजना बनाई जाए। इसी कड़ी में राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिला के ग्रामीण क्षेत्रों की ऐसे 7 पीएचसी क्षेत्रों नामतः भौंडसी, पलड़ा, बादशाहपुर, कासन, भांगरौला, भौड़ाकलां व फरूखनगर की पहचान की गई है जहां पर कोरोना संक्रमण के मामले अपेक्षाकृत अधिक देखे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 3टी पर काम करते हुए 138 टीमे फील्ड में उतारी गई हैं जो घर-घर जाकर एंटीजन टेस्टिंग के माध्यम से कोरोना संक्रमित मरीजों की पहचान कर रही हैं।

सिविल सर्जन डा. विरेन्द्र यादव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना संक्रमण के लक्षण वाले मरीजों की माॅनीटरिंग की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की 138 टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के घर जाकर रैपिड एंटीजन टेस्टिंग कर रही हैं। इस दौरान लोगों को कोविड अप्रोप्रिएट बिहेवियर की पालना करने के साथ साथ आवश्यक सावधानियां बरतने संबंधी जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में यह टेस्टिंग अभियान 8 मई से शुरू किया गया है। इन टीमों द्वारा 8 मई को 1669 घरों में रहने वाले लोगों के रैपिड एंटीजन टेस्टिंग से सैंपल लिए गए जिनमें से 25 लोग पाॅजीटिव पाए गए। इसी प्रकार, 9 मई को 2194 ग्रामीणों के सैंपल एकत्रित किए गए जिनमें से 33 लोगों की रिपोर्ट पाॅजीटिव आई। पाॅजीटिव पाए जाने वाले व्यक्ति की स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा क्लोज माॅनीटरिंग की जाती है और उन्हें होम आइसोलेशन संबंधी मैडिकल किट उपलब्ध करवाई जाती है। पाॅजीटिव आने वाले व्यक्ति को होम आइसोलेशन संबंधी डूज एंड डोन्ट्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है ताकि परिवार के अन्य लोग संक्रमित ना हो।

उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में संक्रमण बढ़ने का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्रों मे कोरोना संक्रमण की समय रहते रोकथाम की जाए। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जिला में रोजाना 12 से 15 हजार लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। इतना ही नही, संक्रमित पाए जाने वाले मरीजों से डाॅक्टरों की टीम द्वारा रोजाना संपर्क करते हुए उनका स्वास्थ्य संबंधी फीडबैक लिया जाता है ताकि उनके स्वास्थ्य संबंधी संशयों को समय रहते दूर किया जा सके। हैल्पलाईन नंबर-1950 के माध्यम से भी लोगों को टीकाकरण कैंप आदि के बारे में जानकारी दी जा रही है। कोरोना संक्रमण की चैन को तोड़ने में कोरोना रोधी टीकाकरण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए लोगों को चाहिए कि वे अपने नजदीकी टीकाकरण केन्द्र पर जाकर अपना टीकाकरण करवाएं और स्वयं तथा अपने परिचितों का इस महामारी से बचाव करें। आयुष इम्यूनिटी किट जिसमें गुडुची घनवटी गोली, आयुष क्वाथ काढ़ा व अणु तेल भी बचाव में सहायक हैं।

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