सामाजिक कार्यों के लिए डा. डीपी गोयल व नवीन गोयल ने महामहिम राज्यपाल ने किया सम्मानित

गुरुग्राम, (मनप्रीत कौर ) : कैनविन फाउंडेशन के संस्थापक डा. डीपी गोयल द्वारा जीवन की जद्दोजहद और आज एक विशेष मुकाम हासिल करके समाजसेवा में अग्रणी संस्था को फिर एक बार हरियाणा के राज्यपाल महामहिम बंडारू दत्तात्रेय ने सराहा। डा. गोयल ने जीवन की शुरुआत से अब तक के सफर को सांझा किया गया। अवसर था गुरुग्राम विश्वविद्यालय में आपदा में अवसर, व्यापार मॉडल की पुनर्रचना विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का।

इस संगोष्ठी में महामहिम राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के साथ गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, कुलपति डा. मार्कण्डे आहूजा, डा. अंजू आहुजा, कैनविन फाउंडेशन के सह-संस्थापक एवं पर्यावरण संरक्षण विभाग भाजपा हरियाणा प्रमुख नवीन गोयल समेत काफी संख्या में अतिथि, शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में महामहिम राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय द्वारा सामाजिक कार्यों के लिए डा. डीपी गोयल व पर्यावरण के क्षेत्र में अनुकरणीय काम करने पर नवीन गोयल को सम्मानित किया गया।

अपने संबोधन की शुरुआत में डा. डीपी गोयल ने कहा कि उनका भी सपना था कि वे डॉक्टर बनें, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के आगे यह सपना आगे नहीं बढ़ पाया। हां, जीवन में विधाता ने जो कुछ लिखा था, वह भी उनके लिए किसी डॉक्टर के जीवन से कम नहीं है। आगे बढऩे को भिवानी से गुरुग्राम आकर उन्होंने बिजनेस को सिरे चढ़ाया। उतार-चढ़ाव आते रहे, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। समाजसेवा का भी साथ में जज्बा रहा। मां को कैंसर हुआ। उस दौरान अनेक डॉक्टर्स के संपर्क में रहे तो बहुत कुछ सीखने को मिला। आम आदमी को स्वास्थ्य के क्षेत्र में होने वाली दिक्कतों को दूर करने की सोच इस दौरान पैदा हुई। मां को तो वे बचा नहीं सके, लेकिन मां के उपदेश को जीवन में आगे बढ़ाते हुए स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने को कदम बढ़ाया। कैनविन फाउंडेशन बनाकर लोगों के स्वास्थ्य पर काम करना शुरू किया। लोगों को अच्छा और सस्ता उपचार मिले, कैनविन फाउंडेशन इसी उद्देश्य से काम करता है।

कोरोना महामारी में दिन-रात खड़े रहे
डा. डीपी गोयल ने कहा कि आपदा में आपदाओं में घबराना नहीं, बल्कि सीखना है। कोरोना महामारी में भी कैनविन ने जमीन से जुड़कर काम किया। दिन-रात जनता की सेवा में खड़े रहे। कोरोना में जैसे ही समस्याएं सामने आई, उसी पर काम करना शुरू कर दिया। घरों पर दवाएं भेजी, एम्बुलेंस सेवा शुरू की। अस्थायी अस्पताल बनाया। प्लाज्मा बैंक में सहयोग किया। वंचितों को भोजन तक उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि कोई भी काम संकल्प लेकर किया जाए तो भगवान साथ देता है। सच्चाई, ईमानदारी से काम करना जरूरी है।

इस उम्र में बहकने से बचें युवा :-

उन्होंने युवाओं पर फोकस करते हुए कहा कि यह उम्र बहकने की है। सबसे बड़ी दिक्कत नशा भी है। इससे हमें दूर रहना है। हमारा चरित्र आदर्शों पर बनता है। आदर्शों की राह में रोड़ा नशा भी है। इससे दूर रहें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सकारात्मक सोच के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के जीवन से हमें संदेश लेना है। किसी महापुरुष को अगर हम अध्ययन करते हैं तो बहुत कुछ सीख सकते हैं। कोई ऐसा महापुरुष नहीं जिसने विपत्तियां नहीं झेली।

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