गुरुग्राम का रिकवरी रेट बढ़कर हुआ 79.64%

गुरुग्राम, (प्रवीन कुमार ) : गुरूग्राम में कोरोना संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होेने की दर में निरंतर सुधार हो रहा है और अब जिला का रिकवरी रेट बढ़कर 79.64 प्रतिशत हो गया है जबकि पिछले सप्ताह यह 75.71 प्रतिशत था।

उपायुक्त ने कहा कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर हम सभी के लिए चुनौतीपूर्ण है ऐसे में जरूरी है कि इससे बचाव के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए टेस्टिंग, ट्रेसिंग व ट्रीटमेंट पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कार्ययोजना बनाई गई है। जिला के 7 हाईरिस्क ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की 138 टीमों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। इतना ही नही, होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना संक्रमित मरीजों के स्वास्थ्य की मैडिकल टीम द्वारा माॅनीटरिंग की जाती है और उन्हें जरूरत अनुसार गाइड किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग तथा आयुष विभाग की टीम द्वारा लोगों को मैडिकल किट तथा इम्युनिटी बूस्टर दवाइंया वितरित की जा रही हैं।

उपायुक्त डा. यश गर्ग ने कहा कि जिलावासियों की जागरूकता तथा जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की सजगता से कोरोना संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने की दर अर्थात् रिक्वरी रेट में लगातार सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमें भविष्य में भी इसी प्रकार सावधानी बरतनी होगी तभी कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव उपायों को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की वजह से आम जनता ने काफी हद तक सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है, जोकि अच्छे संकेत हैं। डा. गर्ग ने कहा कि बेशक गुरूग्राम जिला का रिकवरी रेट अच्छा हो गया है लेकिन अभी भी कोरोना संक्रमण का खतरा टला नहीं है इसलिए सभी को कोविड प्रोटोकोल का पालन जारी रखते हुए सतर्कता बरतनी है।

कोविड प्रोटोकोल की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि सभी लोग घर से निकलते ही फेस मास्क का प्रयोग करें, एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी रखें और कहीं भी अनावश्यक रूप से वस्तुओं को हाथ लगाने से बचे। अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोने या सैनेटाइजर का प्रयोग करने से पहले अपने मुंह या नाक या चेहरे पर हाथ ना लगाएं क्योंकि कोरोना का वायरस मुंह या नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करके हमारी सांस लेने की प्रणाली पर अटैक करता है।

उपायुक्त के अनुसार ज्यादात्तर मरीज एसिम्टोमैटिक हैं अर्थात् जिनमंे बीमारी के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं और ऐसे मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा जा रहा है। जिन लोगों के घरों में आइसोलेशन के लिए पर्याप्त जगह नहीं है उनके लिए जिला प्रशासन ने सैल्फ पेड तथा गवर्नेमेंट पेड आइसोलेशन सुविधाओं की व्यवस्था की हुई है। गवर्नेमेंट पेड सुविधा में मरीज के रहने व खाने आदि की अदायगी सरकार की तरफ से की जाती है। जिन मरीजों को इससे बेहत्तर सुविधाएं चाहिए वे सैल्फ पेड सुविधा में जा सकते हैं जिसके लिए अदायगी उन्हें स्वयं करनी होती है।

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