इतिहासकार डॉ केसी यादव नहीं रहे

इतिहासकार डॉ केसी यादव नहीं रहे

गुरुग्राम,(मनप्रीत कौर) : सेक्टर 23 निवासी हरियाणा के जाने-माने इतिहासकार तथा हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. केसी यादव का आज गुरुग्राम में हृदय आघात से निधन हो गया।

वे 84 वर्ष के थे। गुरुग्राम के सेक्टर 23 में आज उनका अंतिम संस्कार किया गया,जहां उनके बड़े बेटे डॉ. नीरज यादव ने उन्हें मुखाग्नि दी। वे अपने पीछे पत्नी,दो बेटों तथा एक बेटी का भरा पूरा परिवार छोड़ गए। उनके निधन की खबर से हरियाणा, खासकर अहीरवाल में शोक की लहर दौड़ गई।

उल्लेखनीय है कि सन् 1936 में रेवाड़ी जिले के गांव नाहड़ के किसान परिवार में जन्मे डॉ. यादव ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 30 वर्षों तक इतिहास के प्रोफेसर एवं डीन के तौर पर उत्कृष्ट सेवाएं दीं तथा तीन दर्जन से ज्यादा इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित पुस्तकें लिखीं।

वे जापान के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय टोक्यो यूनिवर्सिटी जो फॉरेन स्टडीज में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे तथा अमेरिका, एशिया तथा यूरोप के बहुत सारे देशों में शोधपरक की यात्राएं की।
हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी के संस्थापक अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के मसीहा तथा हिंदी गद्य के जनक यशस्वी साहित्यकार एवं मूर्धन्य पत्रकार स्व.बाबू बालमुकुंद गुप्त पर एक दर्जन से ज्यादा शोध कृतियों का लेखन एवं संपादन किया।

उनका नाम देश के गिने-चुने चर्चित साहित्यकारों में शुमार रहा। वे अपने अंतिम दिनों तक इतिहास एवं संस्कृति के शोध एवं लेखन में साधनारत रहे तथा पिछले दिनों ही उन्होंने इंग्लैंड के रोलट प्रकाशन से प्रकाशित होने वाली उनकी पुस्तक ट्रायल ऑफ बहादुर शाह को अंतिम रूप दिया था।

बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद् के महासचिव सत्यवीर नाहड़िया ने डॉ. यादव के निधन पर शोक जताते हुए इसे हरियाणा प्रदेश के इतिहास एवं संस्कृति के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति बताया है।

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