दुनिया भर में मानवता भलाई कार्यों के साथ मनाया  शाह सतनाम जी महाराज का पावन अवतार दिवस

दुनिया भर में मानवता भलाई कार्यों के साथ मनाया शाह सतनाम जी महाराज का पावन अवतार दिवस

102 जरूरतमंदों को दिए गर्म कंबल

गरीब परिवारों को मिली मकानों की चाबियां

दिव्यांगों को मिला ट्राइसाइकिल का सहारा

मानवता भलाई कार्यों का कारवां बढ़कर हुआ 135

सिरसा, (ब्यूरो ) : पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज का पावन अवतार दिवस डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत ने सोमवार को दुनिया भर में मानवता भलाई कार्यों के साथ मनाया। इस शुभ अवसर पर साध-संगत में अपने सतगुरु के प्रति अटूट प्रेम, श्रद्धा और विश्वास का अनुपम संगम देखने को मिला।

शाह सतनाम जी धाम, सिरसा में नामचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें हरियाणा राज्य से भारी संख्या में साध-संगत ने ही शिरकत की। बाकी राज्यों की साध-संगत ने अपने-अपने ब्लॉकों में ही मानवता भलाई के कार्य करके पावन अवतार दिवस मनाया।

इस पावन अवसर पर पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा चलाए गए 134 मानवता भलाई कार्यों को गति देते हुए 102 जरूरतमंद लोगों को गर्म कंबल, गरीब परिवारों को साध-संगत द्वारा बनाकर दिए गए 4 मकानों की चाबियां और दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिलें दी गईं। नामचर्चा में पूज्य गुरु जी द्वारा साध-संगत के नाम भेजा गया ‘पत्रÓ भी पढ़कर सुनाया गया। वहीं पत्र मानवता भलाई कार्यों की श्रंखला में ‘हम दो, हमारे दो’ या ‘हम दोनों एक और हमारा एक बच्चा होगा’ 135वां कार्य भी शामिल हुआ।

पत्र के माध्यम से पूज्य गुरु जी ने साध-संगत से मानवता भलाई कार्यों को बढ़ चढ़कर करने के लिए आह्वान किया। इसके अलावा ‘कुल का क्राऊन’ मुहिम के तहत एक बेटी भक्त मर्द गाजी के साथ विवाह बंधन में बंधी। वहीं 11 अन्य युगल डेरा सच्चा सौदा की मर्यादानुसार दिलजोड़ माला पहनाकर विवाह बंधन में बंधे। इसके अलावा पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों और न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, इंग्लैंड, कनाड़ा, यूएई सहित विभिन्न देशों की करोड़ों की संख्या में साध-संगत ने ऑनलाइन नामचर्चा का लाभ उठाया।

सोमवार दोपहर 12 बजते ही ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ के पवित्र नारे के साथ आसमां गुंजायमान करके साध-संगत ने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को पावन अवतार दिवस की बधाई के साथ नामचर्चा का आगाज हुआ। इसके पश्चात कविराज भाइयों ने ‘सतगुर, सतगुरु, प्यारे सतगुरु’, ‘जलालआणे आये अवतार जीयो’, ‘आई-आई जी 25 जनवरी प्यारी-प्यारी’, ‘हमरा लख-लख सजदा धरती इस प्यारी को’ आदि भजनों के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया।

इस शुभ अवसर पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के रिकॉर्डिड अनमोल वचन चलाए गए। रिकॉर्डिड वचनों में पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि शाह मस्तान जी, शाह सतनाम जी दाता रहबर ने लोगों को इन्सानियत, मानवता का पाठ पढ़ाया। बचपन से ही संत पीर-फकीर अपने आप में अलग होते हैं। हिन्दी में एक कहावत है पूत के पाँव पालने में नजर आ जाते हैं तो वैसा ही शाह सतनाम जी महाराज के साथ था।

अगर उनके जन्म से पहले की बात करें तो बहुत बड़ा घराना था। पिता वरयाम सिंह जी पूरे गाँव के जैलदार थे। माता आस कौर जी बहुत ही धार्मिक भावना रखती थी। पूजनीय पिता जी ने आपजी का नाम हरबंस रखा, जो वंश को हरा कर दे। इसके बाद बचपन से लेकर युवावस्था तक आपजी के अद्भूत सद्गुण प्रकट हुए। एक बार पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज जब श्री जलालआणा साहिब की ओर गए तो आपजी एक जगह पर रूक गए।

बेपरवाह जी ने वहां पर डंगोरी से एक गोल दायरा बनाया। इस पर वहां मौजूद 10-15 सेवादारों ने पूछा कि साईं जी ये क्या है? इस पर बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने फरमाया कि आओ वरी! आपको रब्ब की पैड दिखाते हैं। वहां मौजूद गाँव के लोगों ने बताया कि ये पैड तो हमारे गाँव के जैलदार हरबंस सिंह की है। इस पर पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने हंसते हुए फरमाया वरी मानों या न मानों ये रब्ब की पैड है।

तत्पश्चात पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के मानवता पर किए गए परोपकारों को दर्शाती एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। नामचर्चा की समाप्ति पर सेवादारों ने आई हुई साध-संगत को कुछ ही मिनटों में लंगर-भोजन खिलाने के साथ-साथ प्रशाद भी वितरित कर दिया गया।

 

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