नतमस्तक नेता मीडिया की डुगडुगी और Ram Rahim का डंका

mishra

 

Viral Sach: सिरसा हो या सुनारिया सुर्खियां उनका दामन कभी नहीं छोड़ती। Ram Rahim का अंदाज, पहनावा, गीत, गाड़ी, डांस, फिल्म, सेवा के काम, भक्तों की भक्ति, साहस और शक्ति, सजा, जेल सदा ही मीडिया के आकर्षण का मसाला और मसला रही है।

राम रहीम का दरबार ऑनलाइन सत्संग इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। रिमोट के सहारे भक्तो का सैलाब पूरे देश में एक जुट कर राम रहीम ने ऑनलाइन गुरुकुल की जो शुरुआत की है उससे कोई आंखें फेर ही नहीं सकता। बैठे-बैठे लाखों लोगों को प्रतिदिन सत्संग सुनाना, हजारों को रोज डेरा सच्चा सौदा से जोड़ना, राम रहीम की लोकप्रियता,दीवानगी, आस्था स्वीकार्यता का स्वरूप बन देश दुनिया सबके सामने है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री के गृह जिले करनाल की मेयर राम रहीम के सत्संग में पहुँच हाज़िरी लगाना, आभार जताना, स्वच्छता अभियान दुबारा शुरू करने का निमंत्रण देना और दर्शन को सौभाग्य बता गौरवान्वित होने की तस्वीरें खबरिया चैनेल की सुर्खियां डिबेट का हिस्सा बन रही है।

जाने अनजाने राम रहीम की ताकत का प्रचार पूरा करने पूरी ऊर्जा के साथ जुट गई है। उनकी कोशिश भले ही बाबा को बदनाम करने की क्यों ना हो, मजबूरी ही सही पर उन्हें वो सब दिखाना पड़ रहा है जिससे मीडिया बरसो तक कतराती रही, बचती और छुपाती रही है।

भक्तों की भीड़, खचाखच भरे पंडाल, सेवा में जुड़े हाथ, झूमती गाती दीवानों की टोली, हाथ जोड़े खड़े नेताओ की कतार, नए शिष्य बनने गुरु दीक्षा लेने आये हजारों नर नारियों की तस्वीरें भी मीडिया को मन मार के ही सही अपनी स्क्रीन पर सजानी ही पड रही हैं, न चाह कर भी ऑनलाइन सत्संग का जलवा दिखाना ही पड़ रहा है।

इन दिनों राम रहीम का दरबार उत्तरप्रदेश में बरनावा में सजा हुआ है, जहाँ से अनावरत बिना रुके बिना थके 24 घंटे में से 20 घंटे संगत के नाम करने वाले राम रहीम ने समय कोई ऐसा साधा है मानो 40 दिन की पैरोल में 40 महीने का काम निपटाने की बेताबी है।

इंटरनेट के माध्यम से देश-विदेश के भक्तों से जुड़ना, उनकी बाते सुनना, समझना, उनके सवालों के जवाब देना, बहते आंसू पोछ मुस्कान की सौगात देना। डेरा के विकास देश भर में नए डेरा केंद्र बनाने की योजना, सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे विद्यालय, महाविद्यालय, अस्पताल की टीम से मिलना संचालन के समस्याओं को सुनना सलाह देना आधुनिक और मानवता से भरी शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार में बढ़ चढ़ कर भाग लेने की राह दिखाना।

डेरा सच्चा सौदा सिरसा में निर्मित खेल गांव में रह खेल की बारीकियां सीख सोना चांदी जीत देश का नाम रोशन करने वाले सैकड़ो खिलाड़ियों के बीच में उनकी उपलब्धि का जायजा लेना और आगे बढ़ने, देश का मान बढ़ाने के लिए प्रेरित कर तिरंगे को सम्मान देने की बात समझाना।

अपनी जान झोंक मौत से मुंह से जिंदगी बचाने वाले ग्रीन एस वेलफेयर के सेवादारों की टीम को समय देना उनके साहस हौसलों की सराहना करना और समाज की सेवा देश के लिए सर्वस्व निछावर करने की ली गई प्रतिज्ञा को याद दिलाना।

दूरदराज देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं में श्रद्धा भाव को उचित मान दे हाथ जोड़ मुस्कुराते हुए सबके बीच आना। समस्या सुनना, सत्य समझना और समझाना यह सिलसिला जो प्रतिदिन प्रातः छः बजे से शुरू होता है रात को जब घड़ी घूम कर दो पर आ टिकती है तभी थमता है। महज चार घंटे के अलप समय मे शयन, विश्राम, सुमिरन, साधना कुछ स्वयं का समय स्वयं को दे राम रहीम फिर उसी दिनचर्या में लग जाते हैं जो अगले बीस घंटे बेरोकटोक, बेधड़क, बेबाक अंदाज से चलती हैं।

ऐसे में मीडिया की डुगडुगी से बेखबर खबर राम रहीम का इस बुलंद अंदाज़ में डंका बजाना कई सवालों को जन्म देता मालूम होता है। पिछली बार भी राम रहीम जब 30 दिन के लिए पैरोल पर आए थे तब भी 15 लाख नए लोगों को गुरु दीक्षा दे डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों भक्तों के कारवां में शुमार किया था। इस बार 40 दिन की पैरोल पर है 20 करोड़ सेवादार बनाने का लक्ष्य तय माना जा रहा हैं।

पचास हज़ार नए लोगों को अपने साथ प्रतिदिन जोड़ने वाले शख्स को खबरिया गिरगिट किसी भी रूप में अपने पर्दो पर प्रस्तुत करें क्या फर्क पड़ता है जब तस्वीरे चीख चीख कर सच बता रही होती है तो कर के चिल्ला चिल्ला कर कुछ और सुनाने से आखिर क्या होगा?

मीडिया के इस मायाजाल से न तो राम रहीम को फर्क पड़ता है और न ही अब उनके भक्तों को न कतार में लग आशीर्वाद पाने की जुगत जुटाने में मशगूल नेताओ को और ना ही गुरु दीक्षा ले सच्चा सौदा से प्रतिदिन जुड़ने वाले हजारों नए लोगो को।

मीडिया के तमाम सूत्रों से सिमटी खबरों का जाल बिछाने के बाद भी अगर बाबा के दरबार मे हैट दल हर सरकार,हर स्तर के नेताओ का तांता लगा है, भक्तो की भीड़ बढती ही जा रही है, करवा थमने का नाम ही नही ले रहा है तो सोचना तो पड़ेगा ही क्यो? ये राम रहीम का जादू है, जुनून है, भक्तो की आस्था भक्ति को ज्वार या सच की शक्ति है जिसका भरोसा कम हो के के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।

राम रहीम के बारे में मीडिया कुछ भी कहे पर एक पहलू तो ये भी है कि ये डुगडुगी राम रहीम के डंके के आगे कही सुनाई नही दे रही।

Translated by Google

Viral Sach: Be it Sirsa or Sunaria, the headlines never leave their arms. Ram Rahim’s style, dress, song, car, dance, film, service work, devotion of devotees, courage and strength, punishment, jail have always been the spice and issue of media attraction.

Ram Rahim’s Darbar Online Satsang remains a topic of discussion these days. With the help of remote, no one can turn a blind eye to the online Gurukul started by Ram Rahim by uniting all over the country. Sitting and reciting satsang to lakhs of people every day, connecting thousands with Dera Sacha Sauda every day, becoming a form of Ram Rahim’s popularity, craze, faith acceptance, the country is in front of everyone.

The pictures of the Chief Minister of Haryana, Karnal’s home district, Karnal, attending the satsang of Mayor Ram Rahim, expressing gratitude, inviting him to resume the cleanliness campaign and being proud to call Darshan a good fortune, are becoming a part of the headlines debate of the news channel.

Knowingly unknowingly, she has gathered with full energy to complete the promotion of Ram Rahim’s power. Even if he tries to defame Baba, he is compelled to show all that the media has been shying away from, hiding and hiding for years.

Crowds of devotees, packed pandals, hands joined in service, a group of fans singing, a line of leaders standing with folded hands, pictures of thousands of men and women who came to become new disciples to take initiation, also adorn the media on their screens. They are falling, even if they don’t want to, they have to show the energy of online satsang.

These days, the court of Ram Rahim is decorated in Barnawa in Uttar Pradesh, from where Ram Rahim, who works in the name of the sangat for 20 hours out of 24 hours without stopping tirelessly, has done the time as if 40 months of work in 40 days parole. eager to settle.

Connecting with the devotees of the country and abroad through the Internet, listening to them, understanding them, answering their questions, giving the gift of smiling tears flowing. Development of Dera Planning to build new Dera centers across the country, meeting the team of schools, colleges, hospitals run by Sacha Sauda, ​​listening to the problems of operation, giving advice, actively participating in the propagation of modern and human-filled teachings. Show the way

Stay in the sports village built in Dera Sacha Sauda Sirsa, learn the nuances of the game, win gold, silver, take stock of their achievements among hundreds of players who have brought glory to the country and move forward, to increase the honor of the country and to honor the tricolor. Explain the matter

To give time to the team of sevadars of Green Ace Welfare, who saved their lives from the death of their lives, to appreciate their courage, spirits and to remind them of the pledge taken to serve the society for the country.

Give due respect to the devotion among the devotees who have come from far away country and abroad and come in the midst of everyone smiling with folded hands. Listening to the problem, understanding and explaining the truth, this cycle which starts every day at six o’clock in the morning ends only when the clock turns around and comes to two. In the short span of just four hours, sleep, rest, sumiran, sadhna, give some self-time to himself, Ram Rahim then engages in the same routine which goes on for the next twenty hours in an unrestrained, fearless, impeccable manner.

In such a situation, the news of Ram Rahim playing the dunk in this lofty style, oblivious to the media’s mischief, seems to give rise to many questions. Last time also when Ram Rahim came on parole for 30 days, even then 15 lakh new people were included in the caravan of crores of devotees of Guru Diksha de Dera Sacha Sauda. This time the target of making 20 crore sevadars is on parole for 40 days.

Present the chameleon on your curtains in any form to the person who adds fifty thousand new people every day. ?

Neither Ram Rahim is affected by this media trap, nor now his devotees, nor the leaders busy in mobilizing blessings in queues, nor the thousands of new people who take Guru Diksha every day to join Sacha Sauda.

Even after laying a web of limited news from all the media sources, if there is an influx of hat teams, leaders of every government, every level in Baba’s court, the crowd of devotees is increasing, Karwa is not taking the name of stopping. So why do you have to think? This is the magic of Ram Rahim, it is the passion, the faith of the devotees is the power of the tide or truth, whose trust is increasing instead of decreasing.

Whatever the media says about Ram Rahim, there is also one aspect that this dugdugi has not been heard anywhere in front of Ram Rahim’s sting.

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