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Chaudhary Santokh Singh – पंचायती राज व्यवस्था को कमज़ोर कर रही है सरकार

Chaudhary Santokh Singh

 

Viral Sach – Chaudhary Santokh Singh – संयुक्त किसान मोर्चा गुरुग्राम के अध्यक्ष एवं जिला बार एसोसिएशन गुरुग्राम के पूर्व प्रधान चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि हरियाणा में पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है तथा पंचायतों के चुनाव न होने से गाँव के विकास कार्य पूरी तरह से ठप्प हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार पंचायती राज व्यवस्था को कमज़ोर कर रही है। पंचायतें लोकतंत्र की नीव हैं। हरियाणा सरकार पंचायतों के चुनाव न करवाकर ना सिर्फ़ पंचायती राज व्यवस्था को कमज़ोर कर रही है, बल्कि लोकतंत्र को भी कमज़ोर कर रही है।

उन्होने हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार पर ग्रामीणों के लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने जानबूझकर पंचायतों के चुनाव पिछले 14 महीने से लटकाए हुए हैं और पंचायतों के अधिकारों को सरकारी प्रशासकों के हाथों में सौंप दिया है।

हरियाणा सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के प्रति दुर्भावनापूर्वक व्यवहार कर रही है, जिसके कारण प्रदेश की 6,200 से अधिक पंचायतें पिछले 14 महीने से भंग चल रही हैं।ग्राम विकास के लिए आवंटित 2,400 करोड़ रुपए का बजट भी वर्ष 2021-22 में इस्तेमाल ना होने के कारण लैप्स हो गया है।

गाँवों में चुनी हुई पंचायत न होने के कारण ग्रामीणों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए भी प्रशासकों से मिलने के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के पास पुलिस सत्यापन, चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड आदि विभिन्न दस्तावेजों में त्रृटि सुधार, सत्यापन के लिए अधिकार होते थे, लेकिन पंचायत ना होने के कारण आम लोगों को प्रशासकों के पास जाना पड़ रहा है, जो ज्यादातर उनके गावों में उपलब्ध नहीं होते।

पंचायती राज व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए सरकार ने भारतीय संविधान में 73वां संविधान संशोधन किया था,जो 24 अप्रैल 1993 को लागू हुआ था।73वां संविधान संशोधन  24 अप्रैल 1993 को लागू हुआ था और इसलिए अब हर वर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि बिना पंचायतों के कैसा राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस?

संविधान के आर्टिकल 243 ई के मुताबिक सरकार पंचायती चुनावों को समय पर करवाने के लिए बाध्य है। सरकार ने पंचायती चुनावों को 14 महीने टालकर संवैधानिक प्रावधानों की उल्लंघना की है। हाल ही में प्रदेश में जब से ग्राम पंचायतें भंग हुई है,तब से ग्रामीण विकास के मामलों में सैंकड़ों करोड रुपए के घोटाले और भ्रष्टाचार के अनेक मामले सामने आ चुके हैं।

उन्होंने सरकार से माँग की कि हरियाणा में पंचायतों के चुनाव करवाए जाएं ताकि गांवों में विकास कार्य हो सके तथा ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हो सके।

Chaudhary Santokh Singh

Translated by Google 

Viral Sach – Chaudhary Santokh Singh, president of United Kisan Morcha Gurugram and former head of District Bar Association Gurugram, said that the Panchayati Raj system in Haryana has completely collapsed and the development work of the village has come to a standstill due to non-election of panchayats. Are.

He said that the government is weakening the Panchayati Raj system. Panchayats are the foundation of democracy. By not conducting Panchayat elections, the Haryana government is not only weakening the Panchayati Raj system, but is also weakening democracy.

Accusing the BJP-JJP government of Haryana of violating the democratic rights of the villagers, he said that the government has deliberately delayed the panchayat elections for the last 14 months and has handed over the rights of the panchayats to the government administrators.

The Haryana government is behaving maliciously towards rural areas, due to which more than 6,200 panchayats in the state have been dissolved for the last 14 months. The budget of Rs 2,400 crore allocated for rural development is also not being used in the year 2021-22. It’s lapsed.

Due to the absence of elected panchayats in the villages, the villagers have to go round and round to meet the administrators even for their small works. He said that Panchayat representatives used to have rights for police verification, getting character certificate, voter ID card, Aadhaar card etc. error correction, verification in various documents, but due to non-existence of Panchayat, common people have to go to the administrators. Which are mostly not available in their villages.

To strengthen the Panchayati Raj system, the government had made the 73rd Constitutional Amendment to the Indian Constitution, which came into force on 24 April 1993. The 73rd Constitutional Amendment came into force on 24 April 1993 and hence now every year 24 April is celebrated as National Panchayati Raj Day. is celebrated. He questioned the government that what kind of National Panchayati Raj Day without Panchayats?

According to Article 243 E of the Constitution, the government is bound to conduct the Panchayati elections on time. The government has violated constitutional provisions by postponing the Panchayati elections by 14 months. Recently, ever since the gram panchayats were disbanded in the state, many cases of scams and corruption worth hundreds of crores of rupees have come to the fore in the matters of rural development.

He demanded from the government that panchayat elections should be conducted in Haryana so that development work can be done in the villages and the problems of the villagers can be solved.

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