ठंड में ठिठुर रहे लोग, सो रहा निगम, नदारद हुए क्षेत्र के मेयर, विधायक और पार्षद : पंकज डावर

ठंड में ठिठुर रहे लोग, सो रहा निगम, नदारद हुए क्षेत्र के मेयर, विधायक और पार्षद : पंकज डावर

Viral Sach : साइबर सिटी गुड़गांव में ठंड ने पूरी तरह से दस्तक दे दी है। यहां बढ़ती ठंड और प्रदूषण के कारण मौसमी बीमारियां तेजी से बढ़ रहे हैं जिससे गरीब तबके के लोग परेशान हैं। गुड़गांव में हजारों की संख्या में लोग फुटपाथ पर सोते हैं, जो बढ़ती ठंड के बाद भी खुले आसमान के नीचे आज भी सोने को मजबूर हैं। यहां नगर निगम, क्षेत्र के विधायक, मेयर, पार्षदों समेत भाजपा के नेताओं द्वारा तरह-तरह के दावे किए जाते हैं ।

लेकिन सभी दावे गरीबों को सुविधाएं देने के नाम पर खोखले साबित हो रहे हैं। यह बात काग्रेस व्यापार सेल के चेयरमैन पंकज डावर ने बीती रात फुटपाथ पर सोने वाले लोग हैं से मिलने के बाद की। पंकज डावर ने बताया कि बीती रात वे सिविल लाइंस क्षेत्र में पैदल ही घूम रहे थे, जिस दौरान उन्होंने देखा कि रात करीब 11:00 बजे के बाद फुटपाथ पर खुले आसमान के नीचे अलग-अलग दर्जनों स्थानों पर मजदूर तबके के लोग सो रहे हैं। फुटपाथ पर खुले आसमान के लोग जहां सो रहे हैं वहां से 500 मीटर के दायरे में विधायक निवास, विधायक कार्यालय, मेयर निवास, विभिन्न पार्षदों का निवास, नगर निगम अधिकारियों का निवास एवं नगर निगम का कार्यालय पड़ता है।

पंकज डावर ने कहा कि फुटपाथ पर सोने वाले लोगों के बगल से ही निगम के अधिकारी, अन्य प्रशासनिक अधिकारी, विधायक व दर्जनों पार्षद रोजाना निकलते हैं, लेकिन किसी की निगाह इन गरीब तबके के लोगों पर नहीं पड़ती। पंकज डावर ने कहा कि जिस तरह से भाजपा के सभी नेता, पार्षद, विधायक, मेयर सिर्फ हवा हवाई बयानबाजी करने में तेज हैं, उसी तरह अब नगर निगम और अन्य विभागों के प्रशासनिक अधिकारियों का भी रवैया शहर में देखने को मिल रहा है।

पंकज डावर ने मांग की है कि नगर निगम तत्काल प्रभाव से रैन बसेरो का निर्माण करवाए और जो पहले से नगर निगम की तरफ से रैन बसेरा बनाए गए थे उनको सुचारु रुप से दोबारा से शुरू कराए। पंकज डावर ने यह भी कहा कि नगर निगम के अधिकारी अगर शहर में रैन बसेरों का निर्माण करने में असमर्थ है तो वे नोटिस जारी करे कि निगम की ओर से इस साल रैन बसेरों की सुविधा नहीं दी जाएगी, जिससे अन्य समाजसेवी लोग गरीबों की मदद के लिए आगे आ सके।

क्योंकि बहुत से लोगों को पता नहीं है कि इन गरीबों को रेन बसेरा भी नसीब नहीं हो रहा है। अगर लोगों को पता होता तो साइबर सिटी में मदद करने वालों की भी कोई कमी नहीं है।

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