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Sandeep Mishra – दीदी ओ दीदी के बाद अब्बा जान

Sandeep Mishra

 

Viral Sach – दिल्ली : Sandeep Mishra – दीदी ओ दीदी… की अपार सफलता के बाद अब आ गया अब्बा जान, बंगाल के चुनावी संग्राम में बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे की जुबान से एक महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ललकारते हुए अंदाज में दीदी ओ दीदी बोल बीजेपी का डिब्बा गोल कर बैठे। देश के सबसे बड़े प्रदेश में चुनावी बिगुल फूंक दिया गया है और बातों के तूफान में देश के सबसे बड़े प्रदेश के मुखिया का तंज भरा तीर “अब्बा जान” जुबानी जंग का धारदार हथियार बन वार, प्रतिकार की मिसाल बना विपक्ष को बेचैन कर रहा है।

खुद को संस्कार की जननी बताने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कोख से जन्मी बीजेपी में संघ ने कैसे संस्कार भरे हैं यह बताने के लिए बीजेपी नेताओं की जुबान ही काफी है। इन जुबांवीरो की जुमलेबाजो की टोली में तूती बोल रही है, एक से बढ़कर एक बातों का तूफान बनाने वाले अफलातून से भरी पड़ी हैं फूल वालों की ये पार्टी। दल का आदर्श मुखिया ही होता है मुखिया ही जब सरेआम मंच से एक महिला मुख्यमंत्री को अपमानित करने वाली शैली में दीदी ओ दीदी कहकर ललकारने का राग अलाप रहा हो तो फिर छूट भैया नेताओं को भला कौन क्या समझा, सिखा, बता सकता है। ये बदजुबानी की आजादी, बेतुके बोल का ढोल, अभिमान की शैली, बातों का पहाड़ बना बातरस बांटने वाले बीजेपी के नेताओं के बयान सुन आप सन्न रह जाएंगे।

सोचने को मजबूर हो जायेंगे क्या ये समाज का नेतृत्व करने लायक हैं? क्या सच ये देश की सबसे बड़ी पंचायत में बैठने की काबिलियत रखते हैं? सबका साथ सबका विकास संकल्प के सारथी ही बन साथ चल सकते हैं? सोचिए इनके बातों के रोज फूटते बम समाज को क्या संदेश दे रहे हैं? क्या सरकार बन जाना कुछ भी बोलने, कहने, बताने की आजादी देता है? क्या सरकार की कोई मर्यादा नहीं होती? क्या सरकार की कोई जवाबदेही नहीं? जुबान पर लगाम कसने वाला कोई नहीं?

 

sandeep mishra

इन दिनों अब्बा जान, अब्बा जान बोल जोर से जोश से दहाड़ उत्तर प्रदेश के मुखिया सुर्खियों में हैं भाषणों में जमकर बरस रहे हैं, उसी पुराने धुन पर जिसकी महारत हासिल है उन्हें। कभी अपनी जान की सुरक्षा मांगते भरी संसद में फूट-फूटकर रोने वाले अजय सिंह बिष्ट उर्फ योगी बाबा के मुख मंडल से अब्बा जान का उच्चारण तूफान बन कोहराम मचा रहा है। अभी तो शुरुआत है अभी तो जुबानी जहर की कुछ बूंदे ही गिरी हैं। चुनाव चरम पर होगा तो राम जाने कौन-कौन, क्या-क्या, कैसे-कैसे बोल बोलेगा? कान खोल कर, दिल संभाल कर रखना ये नेतागीरी है यहाँ सब जायज है। बाबा के बोल मुख्यमंत्री बनने से पहले भी आग लगाऊ ही थे आज भी कोई अंतर नहीं आया मालूम होता है। बाबा जी के जुबान की ज्वाला जस की तस बरबस बरस रही है ये आग आने वाले समय में और प्रचंड होगी क्योंकि जब आगाज़ आज ही ऐसा है तो अंजाम क्या होगा? सोच कर ही कलेजा मुँह को आता है।

बाबाजी इकलौते बोलवीर नहीं हैं, बाबा से भी बढ़कर बोलबाजों से भरी पड़ी है बीजेपी। बड़े कद के नेता राधा मोहन ने तो ओवैसी को वायरस बता यहाँ तक कह दिया इन जैसों का इलाज बीजेपी के पास ही है। इंसान कैसे वायरस हो गया यह माँ राधा की दी आँखों से दिखा या मोहन की प्रदान दिव्य दृष्टि से राधामोहन बता नहीं पाए। बीजेपी में भगवा भेष धारियों के चिमटे से ज्यादा जुबान बजती है। इनमें शुमार हैं साध्वी प्राची जिन्होंने शंखनाद कर भरी सभा से आह्वान किया की उन्हें “मुस्लिम मुक्त भारत चाहिए” किसी ने क्या बिगाड़ लिया उनका, कुछ नहीं, फिर क्या एक ओर साध्वी निरंजन ज्योति ने ललकारा “दिल्ली में रामजादो की सरकार बनेगी या हरामजादो की” जनता को तय करना है। ज्योति की जुबानी ज्वाला गौरवमयी देश के गलियों में धधकी फैली और भारतीयता के मान को तपिश में घेर भी लिया पर उनका बिगड़ा कुछ नहीं।

एक और बाबा जो गेरुए रंग में रंगे इन्हीं की तरह सांसद हैं पूरा देश उनकी बदजुबानी का साक्षी है, साक्षी महाराज तो जब भी बोलेंगे मानो जहर ही घोलेंगे। संत की दीक्षा पाकर संत से सांसद बने साक्षी महाराज ने गृहस्थ आश्रम की महिलाओं को झकझोर कर रख दिया, ज्यादा बच्चा पैदा करने की जरूरत को समझाते हुए साक्षी महाराज महिलाओं को बच्चा पैदा करने का कारखाना बनाने पर तुल गए हैं वो सरेआम सलाह देते हैं हिंदू महिलाओं को चार बच्चे पैदा करने चाहिए ताकि हिंदू धर्म की रक्षा हो सके ये वही साक्षी महाराज हैं जिन्होंने “राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के हत्यारे को राष्ट्रभक्त बता शहीद कहने का दुस्साहस भी किया था।”

 

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इनकी भी सोच से आगे बहुत आगे बढ़ महाराष्ट्र के एक नेता जिन्होंने खुद बेटियों का अपहरण कर जबरन शादी कराने का काम शुरू करने का मन बना लिया है, शिवसेना ने उनका नाम रावण कदम रखा वैसे राम भक्तों के दल में राम कदम के नाम से विख्यात हैं पर उनका काम कुख्यात रावण सरीखा कारनामा से कम नहीं। जन्माष्टमी के दिन जवानों की टोली देख उनकी बोली फूटी महोदय ने संबोधन किया “अगर आप किसी लड़की से प्यार करते हैं और वह नहीं मानती, तो मुझे बताएं मां-बाप के साथ मेरे पास आए, मां बाप भी नहीं मानते तो मैं उस लड़की को उठा कर लाऊंगा, और उसे आपके पास सौप दूंगा।”

यही काम माँ सीता के साथ लंकापति पहले कर चुका है, अंजाम भी दुनिया जानती है अब बीजेपी के राम कदम दुश्शासन, दशानन की राह पर बेटियां उठाने की जिम्मेदारी अपने कांधे पर ले जवानों में जोश भर रहे हैं। तालिबानी भी तो यही कर रहे हैं, तालिबानी भी महिलाओं से यही कह रहे हैं। राम कदम बीजेपी नेता हैं, सरकार बीजेपी की है, जो जी में आए कह सकते हैं, कर सकते हैं, महिलाओं को बेटियों को घर से उठा सकते हैं। संविधान के सम्मान, समझ से परे इन जुबांबाजो के बोल बल की आत्मा समाज के बंधन पर बार-बार करारा प्रहार कर रही है। पर संविधान का ही क्या? जब बीजेपी की चाह ही बाबा साहब के संविधान को ही बदलने की मंशा रखती है।

 

Translated by Google

Viral Sach – Delhi: Sandeep Mishra – After the immense success of Didi O Didi… now Abba Jaan has come, in the style of Didi O challenging a woman Chief Minister Mamta Banerjee by the tongue of BJP’s biggest face in Bengal’s election battle Didi Bol BJP’s box sat round. The election bugle has been blown in the country’s largest state and in the storm of talks, the taunting arrow of the head of the country’s largest state “Abba Jaan” has become a sharp weapon of war of words, making the opposition restless by becoming an example of retribution. .

Born from the womb of the Rashtriya Swayamsevak Sangh, which calls itself the mother of culture, the words of the BJP leaders are enough to tell how the Sangh has inculcated values in the BJP. Tuti is speaking in the group of jumlebajos of these Jubanviros, this party of flower people is full of Aflatoons who create a storm of one thing more than the other. The ideal head of the party is the head, when the head is publicly chanting a female Chief Minister in a humiliating style, saying Didi o Didi, then who can understand, teach, tell the leaders, Mukhot Bhaiyya. You will be shocked to hear the statements of the BJP leaders who have made this freedom of profanity, the drum of absurd words, the style of pride, a mountain of talks and dividing the people.

Will be forced to think, are they capable of leading the society? Is it true that he has the ability to sit in the biggest panchayat of the country? Can everyone’s company be the charioteer of everyone’s development resolution and move together? Think what message the bombs exploding on their words are giving to the society? Does becoming a government give freedom to speak, say or tell anything? Does the government have no limits? Is there no accountability of the government? No one to control the tongue?

These days, Abba Jaan, Abba Jaan Bol, loudly roaring with enthusiasm, the Chief Minister of Uttar Pradesh is in the limelight, raining heavily in his speeches, on the same old tune which he has mastered. The pronunciation of Abba Jaan from the mouth of Ajay Singh Bisht alias Yogi Baba, who used to weep bitterly in the Parliament asking for the safety of his life, is creating a storm like a storm. It is just the beginning, so far only a few drops of verbal poison have fallen. If the election is at its peak, who knows who, what, how and how Ram will speak? Keeping your ears open and your heart safe is leadership, everything is fair here. Baba’s words were used to set fire even before becoming the Chief Minister, it seems that there is no difference even today. The fire of Baba Ji’s tongue is raining as it is, this fire will be more intense in the coming time, because when the beginning is like this today, then what will be the result? The heart comes to the mouth only by thinking.

Babaji is not the only bolveer, BJP is full of more bolveers than Baba. Tall leader Radha Mohan even called Owaisi a virus and went so far as to say that BJP has the cure for people like him. Radha Mohan could not tell how a human being became a virus through the eyes of Mother Radha or through the divine vision provided by Mohan. In BJP, the tongue rings more than the tongs of saffron disguised. Sadhvi Prachi is one of them, who called out to the crowd that she wanted a “Muslim-free India”. What harm has anyone done to her, nothing, then Sadhvi Niranjan Jyoti defied, “Will the government of Ramzado or bastards be formed in Delhi?” “The public has to decide. The flame of Jyoti’s words spread in the streets of the proud country and surrounded the pride of Indianness in the heat, but nothing harmed them.

Another baba who is painted in saffron color is a parliamentarian like him, the whole country is witness to his foul language, whenever Sakshi Maharaj speaks, it is as if he will mix poison. Sakshi Maharaj, a saint-turned-MP after being initiated by a saint, shocked the women of Grihastha Ashram, explaining the need to have more children, Sakshi Maharaj is hell-bent on turning women into childbearing factories, he openly advises The Hindu Women should give birth to four children so that Hindu religion can be protected. This is the same Sakshi Maharaj who “had the audacity to call the killer of Father of the Nation Mahatma Gandhi a patriot and a martyr.”

Far ahead of their thinking, a Maharashtra leader who himself has made up his mind to start the work of kidnapping daughters and forcibly getting them married, Shiv Sena named him Ravana Kadam, otherwise known as Ram Kadam in the group of Ram devotees. But his work is no less than the exploits of the infamous Ravana. Seeing the group of jawans on the day of Janmashtami, he was speechless, sir addressed, “If you love a girl and she does not agree, then tell me, come to me with your parents, even if your parents do not agree, then I will marry that girl.” I’ll pick it up and hand it over to you.”

Lankapati has already done the same thing with mother Sita, the world knows the result. Now BJP’s Ram Kadam Dusshasan, taking the responsibility of raising daughters on the path of Dashanan, is filling the jawans with enthusiasm. The Taliban are also doing the same thing, the Taliban are also saying the same thing to the women. Ram Kadam is a BJP leader, the government belongs to the BJP, he can say whatever he wants, he can do it, he can pick up women and daughters from their homes. Beyond the respect and understanding of the Constitution, the spirit of the words of these tongue-tied people is repeatedly attacking the bonds of the society. But what about the constitution itself? When the desire of BJP only intends to change the constitution of Babasaheb.

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