Gurugram

Swami Gyananand – भगवान को सारथी बनाकर जीवन की महाभारत में चलते रहो

Swami Gyananand

 

Viral Sach – गुरुग्राम : गीता मनीषी Swami Gyananand महाराज ने कहा कि भगवान को सारथी बनाकर जीवन की महाभारत में चलते रहो। संघर्ष सबके जीवन में हैं और रहेंगे। महाभारत लगातार सबके साथ हो रही है। कहीं अंदर वृतियों की कहीं बाहर अनुकूलता, प्रतिकूलता की महाभारत होती है। भगवत गीता यही मूल मंत्र है कि संघर्षों में घबराएं नहीं। यह बात उन्होंने गुरुवार को यहां सेक्टर-4 स्थित वैश्य समाज धर्मशाला में दिव्य गीता सत्संग के अंतिम दिन कही।

स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने आगे कहा कि हमारे संघर्ष हम पर इतने हावी ना हो जाएं कि हम अपने कर्तव्य पथ से भटक जाएं। सबको तनाव हो जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने देखा था कि भविष्य में भौतिकवाद का जितना विस्तार बढ़ेगा, उतने तनाव, दबाव व दुर्भाव बढ़ते जाएंगे। वह आज दिखाई भी दे रहा है। पहले छोटे मकान होते थे बड़े परिवार होते थे।

कम साधनों में भी शांति थी। आज सब कुछ होते हुए अशांति, तनाव बढ़ता जा रहा है। ऐसी ही स्थितियों में भगवत गीता उपचार का मार्ग दिखाती है। भगवान श्रीकृष्ण ने केवल अर्जुन की नब्ज नहीं देखी, बल्कि पूरे संसार की भविष्य की देखी। गीता का संदेश उपचार भविष्य की सही नब्ज देखकर किया हुआ सही उपचार है। उन्होंने कहा कि उपदेश नहीं उपचार है गीता, मानवता का श्रृंगार है गीता।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लगता है भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता न सुनाई होती तो महाभारत ना होती। ऐसे प्रश्नों को कटाक्ष के रूप में भी लोग लेते हैं। कुछ तर्क-कुतर्क का रूप देकर गौरव महसूस करते हैं। उन्हें केवल कटाक्ष ही करना है। चिंतन की दृष्टि से श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व को देखें तो हर समस्या का समाधान निकलता है।

भगवत गीता को उदार भाव से देखें तो हर बात का समाधान मिलेगी। हर शंका का समाधान करती है भगवत गीता। महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कई स्तरों पर महाभारत का युद्ध टालने के प्रयास किए थे। उन्होंने स्वयं दुर्योधन जैसे की सभा में जाकर संधि दूत बनकर उन्हें समझाने का प्रयास किया। उन्होंने बहुत ही विनम्र आग्रह दुर्योधन से किया कि युद्ध ना करो। इसके लिए वे यह प्रस्ताव लेकर आए हैं।

पाकिस्तान पर तंज कसते हुए स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि पड़ोसी देश बार-बार ऐसे माहौल बनाता है तो सर्जिकल स्ट्राइक करने ही पड़ेंगे और किये भी गये हें। सीमा पर खड़ा सैनिक शस्त्र छोड़े तो कमांडर का कर्तव्य जो होता है, वही कर्तव्य श्रीकृष्ण ने गीता उपदेश में निभाया है। गीता में युद्ध की स्थिति संघर्षों की है। गीता जैसे ज्ञान की आवश्यकता केवल किसी एकांत स्थल में ही नहीं, इसके ज्ञान की आवश्यकता वहां है जहां अशंाति है शांति का तलाश है।

जहां वातावरण में दुर्भावनाएं हैं, सद्भावनाओं की तलाश है। इसलिए महाभारत युद्ध में गीता का उपदेश देकर भगवान श्रीकृष्ण ने यह विश्व को दिखाया कि यह ज्ञान संघर्षोंं की भूमि से प्रकट हुआ है। संघर्षों में शांति कैसे बनाई जाए। आज सभी के जीवन की एक सी मांग शांति ही है। अशांति में सब जूझ रहे हैं। जहां अशांति है, भगवत गीता को सहायक बनाओ। चिंताएं दूर होंगी।

महाभारत युद्ध में गीता उपदेश का सीधा आह्वान था कि युद्ध में भी शांति का उद्घोष है। यह है हमारा भारत। जहां युद्ध भूमि में भी शांति की सोच है। बात हो रही है। जीवन में हमें भी इस विश्वास को साथ रख पाएं, जैसे अर्जुन ने श्रीकृष्ण के साथ रहने मात्र को सब कुछ बताया। हमें भी जीवन में ऐसा ही करना चाहिए। संघर्षों की ऊहापोह में कोई वैज्ञानिक चीज काम नहीं होती। एसी की कूलिंग मन की अशांति दूर नहीं कर सकती।

इस अवसर पर जीओ गीता के युवा राष्ट्रीय सचिव नवीन गोयल, हरियाणा सीएसआर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष बोधराज सीकरी, पूर्व मंत्री धर्मबीर गाबा, जीएल शर्मा, भानीराम मंगला, रेलवे सलाहकार बोर्ड के सदस्य डीपी गोयल, सुरेंद्र खुल्लर, श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति के प्रधान गोविंद लाल आहुजा, महासचिव सुभाष गाबा, महावीर भारद्वाज समेत अनेक धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।

 

Swami Gyananand

Translated by Google 

Viral News – Gurugram: Geeta Manishi Swami Gyananand Maharaj said that keep walking in the Mahabharata of life by making God your charioteer. Struggles are and will remain in everyone’s life. Mahabharata is happening continuously with everyone. Somewhere inside, there is a Mahabharata of compatibility and adversity, somewhere outside. The basic mantra of Bhagvat Gita is not to panic in conflicts. He said this on the last day of Divya Gita Satsang at Vaishya Samaj Dharamshala, Sector-4 here on Thursday.

Swami Gyananand Maharaj further said that our struggles should not dominate us so much that we deviate from the path of our duty. Everyone gets stressed. Lord Shri Krishna had seen that the more the expansion of materialism will increase in future, the more tension, pressure and evil will increase. It is visible even today. Earlier there were small houses, there were big families.

There was peace even in meager means. Today, despite everything happening, unrest and tension are increasing. In such situations, the Bhagavad Gita shows the way of remedy. Lord Krishna not only saw the pulse of Arjuna, but saw the future of the whole world. Message treatment of Gita is the right treatment done by looking at the right pulse of the future. He said that Gita is not a sermon, it is a cure, Gita is the makeup of humanity.

He said that some people feel that had Lord Krishna not narrated the Gita to Arjuna, there would have been no Mahabharata. People also take such questions as sarcasm. Some feel proud by giving the form of argument. All they have to do is sarcasm. If we look at Shri Krishna’s personality from the point of view of contemplation, every problem can be solved.

If you look at Bhagavad Gita with a liberal mind, you will get solution for everything. Bhagavad Gita solves every doubt. Maharaj Shree said that Lord Krishna himself had tried to avoid the war of Mahabharata on many levels. He himself tried to convince Duryodhan by becoming an ambassador of peace by going to the assembly. He very politely requested Duryodhana not to fight. For this they have come up with this proposal.

Taking a jibe at Pakistan, Swami Gyananand Maharaj said that if the neighboring country creates such an atmosphere again and again, then surgical strikes will have to be done and they have been done. Shri Krishna has performed the same duty in the teachings of the Gita, which is the duty of a commander if a soldier standing on the border lays down his weapon. The situation of war in Gita is of conflicts. Knowledge like Gita is needed not only in a secluded place, its knowledge is needed where there is unrest, there is a search for peace.

Where there is malice in the environment, there is a search for goodwill. That’s why by preaching the Gita in the Mahabharata war, Lord Krishna showed the world that this knowledge has emerged from the land of struggles. How to make peace in conflicts. Today, the only demand of everyone’s life is peace. Everyone is struggling in peacelessness. Where there is unrest, make the Bhagavad Gita helpful. Worries will go away.

In the Mahabharata war, there was a direct call of Gita preaching that there is a declaration of peace even in war. This is our India. Where there is a thought of peace even in the battlefield. Talking is happening. May we also be able to keep this faith with us in life, as Arjun told everything just to be with Shri Krishna. We should also do the same in life. No scientific thing works in the heat of conflicts. The cooling of the AC cannot remove the disturbance of the mind.

On this occasion, Youth National Secretary of Geo Geeta, Naveen Goyal, Vice President of Haryana CSR Trust, Bodhraj Sikri, former ministers Dharambir Gaba, GL Sharma, Bhaniram Mangla, Railway Advisory Board members DP Goyal, Surendra Khullar, Shri Krishna Kripa Seva Samiti President Govind Lal were present. Ahuja, General Secretary Subhash Gaba, Mahavir Bhardwaj and many religious lovers were present.

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