जनवरी में सजता है मानवता का महाकुंभ

जनवरी में सजता है मानवता का महाकुंभ

दिल्ली(ब्यूरो)सरस्वती नदी की धारा के किनारे बसे सरस वन जिसे आधुनिक भारत सिरसा के नाम से जानता है। वेदों में संत,सरस्वती, साधना,सेवा,सहयोग, समर्पण,पुराण,उपनिषद की रचना के इस धरा को सरस वन के नाम से ही वर्णित किया गया है। ज्ञान की देवी मां सरस्वती की साधना कर संसार को वरदान स्वरूप प्रकाश पुंज देने वाले मनीषियो, मानवता का उपकार करने वाले साधकों,समाज को सच की राह दिखाने वाले संतों और दुनिया में जाति पात ऊंच नीच गरीब अमीर की दीवार ढहा “मानस की एक जाति सभी जन एक है” की भावना के भवन को बसाने वाले बस आने वाले शाह मस्ताना जी ने इसी पावन धरा पर आपने गुरु सावन सिंह शाह के आदेश पर ब डेरा सच्चा सौदा धाम की नीव रखी,जो मानवता की मिशाल बन दुनिया रौशन कर रहा है।
सरस वन से सरसा फ़िर सिरसा और डेरा भक्तो के बीच शाह सतनाम की नगरी के रूप में विश्व विख्यात सिरसा में जनवरी माह में मानवता का महाकुंभ सजता है। इस पूरे जनवरी महीने में डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों सेवादार पूरे संसार में मानवता की सेवा में खुद को समर्पित कर अपने गुरु शाह सतनाम जी के अवतार मां को मानवता का महीना बना सर्वस्व निछावर करने का संकल्प लेते हैं। सिरसा में देश के कोने-कोने और सात समुंदर पार से भक्तों की टोली डेरा सच्चा सौदा पहुंच गुरुदेव की चौखट चूम निहाल होती है।
दुनिया भर में डेरा सच्चा सौदा के सेवादार सेवा,समर्पण से मानवता को बचाने के लिए सबसे पहली कतार में शुमार है। ब्लड फैक्ट्री के नाम से भी जाना जाता है डेरा सच्चा सौदा को जहां भक्त खुशी खुशी गाते हैं “खून बिन जाने ना देंगे जिंदगी” लाखों श्रद्धालु प्रति तीन माह पर स्वेच्छा से नियमित रक्तदान कर खून की नदियां देश को अर्पित करते हैं जिससे जरूरतमंद की जिंदगी बचाई जा सके। सालों साल भारतीय सेना को रक्त दाताओं की सूची में डेरा सच्चा सौदा सर्वोच्च स्थान पर काबिज रहा है। मां गंगा की दुर्दशा जब देखी नहीं गई तो हरिद्वार की हर की पौड़ी पर 15 लाख श्रद्धालुओं के साथ संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा ने डेरा डाल दिया, मां गंगा की धारा,हाट,घाट शहर की गंदगी को भक्तों ने अपने सिर पर रख पूरे के पूरे हरिद्वार को संवारा साफ किया, जिसका गवाह बना पूरा हिंदुस्तान। उस पावन धरती से यह नारा भी फिजा में गूंजा ” गंगा हमारी मां है तो,मां के मुंह में कूड़ा क्यों?” डेरा सच्चा सौदा सिरसा समाज का वरदान है, सेवा का संसार, मानवता का मंदिर, कुरीतियों को तोड़ने मानव को मानव से जोड़ने वाला वो दर है जिसने हर बेसहारा को सहारा दिया, हारे हुए की उम्मीद, हौसले की जीत डेरा सच्चा सौदा ने मे अनूठी मिसालो की लंबी कतार है, जिसमें वेश्याओं का कन्यादान, जीते जी किडनी दान, निसंतानों को पुत्र दान, विकलांग वर से बेटियों का शादी करना, बेटियों का अर्थी को कंधा देना और मां-बाप को मुखाग्नि देने की शुरुआत, जीते जी रक्तदान जाते-जाते नेत्रदान कुछ सेवादार तो यह भी शान से कहते हैं कि “लेकर नहीं कुछ वापस जाना यह शरीर भी दान है”। ऐसी अद्भुत सेवा समर्पण की दुनिया, दुनिया भर में डेरा सच्चा सौदा के सिवाय कहीं मिल ही नहीं सकती।
डेरा सच्चा सौदा की नीव ड़ाल शाह मसतना जी ने संसार को मानवता का मंदिर दिया। शाह मस्ताना जी ने अपने जीवन का रूप स्वरूप शक्ति खुद अपने शिष्य शाह सतनाम जी दाता को सौंप एकरूप हो गए, गुरु से भक्ति भक्ति शक्ति अर्जित कर खुद खुदा का नूर बन शाह सतनाम जी ने डेरा सच्चा सौदा के दायरे को बढ़ाया। जनवरी माह उनका अवतार महीना है जिसे परोपकार महीने के रूप में पूरी दुनिया में फैले डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायी धूमधाम से मनाते हैं,और मानवता की नगरी सिरसा में मानव का महाकुंभ सजाते है, जिसकी छटा, जिसका रूप, इसकी भाव, जिसकी भावना, इसका भरोसा अकथनीय,अकल्पनीय, अवर्णनीय लगता है। पावनता, मानवता, भावना और समर्पण का सर्वोच्च धाम डेरा सचा सौदा मानव कल्याण में समर्पित वह मंदिर है जहां खुशी, हंसी, उम्मीद,भरोसा, सहयोग पल पल आपका साथ निभाने को आतुर दिखते हैं। राहत,चाहत करूंणा के इस महा समंदर की हर लहर संसार के हर कहर को मिटाने के लिये काफी है।सन्तो की इस धरा,मा सरस्वती की धारा,वेदो जाए रचना की जमी उपनिशदो की धरती को शत शत नमन। निकालिये समय और समा जाइये मानवता के इस महाकुंभ सिरसा मे।

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