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1947 के विभाजन का दर्द, बुजुर्गों की जुबानी – दीनदयाल डुडेजा

1947, दीनदयाल डुडेजा

 

Viral Sach – 1947 – मेरा नाम दीनदयाल डुडेजा है | मेरी उम्र 82 साल है, मेरा जन्म 15 मई 1939 के तहसील तौंसा शरीफ़ में हुआ था | मेरे दादा जी की अनाज की दुकान थी | पिता जी अपना व्यापार शुरू करने के लिए सन 1944 में अपने परिवार सहित जिला डेरा गाजी खान में चले गये | हमारे परिवार में मेरे पिता, मेरी माता, मेरी दो बहनें तथा एक छोटा भाई थे | पिता जी ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर कपड़ों का व्यापार शुरू किया |

सन 1947 में जब हिंदुस्तान व पाकिस्तान के बंटवारे का माहौल बना, तब मेरे पिता जी व छोटे भाई (जिसकी उम्र 4 साल की थी) को लेकर दादा-दादी को मिलने तौंसा शरीफ गये | वापिस आते समय दंगाईयों ने बस लूट ली तथा मेरे पिता व छोटे भाई को बेरहमी से मार डाला | यह खबर सुनकर मेरे दादा-दादी ने मुझे, मेरी माता जी तथा मेरी दोनों बहने को डेरा गाजी खान से वापिस तौंसा शरीफ़ बुला लिया |

अक्टूबर, 1947 में जब मेरी उम्र 8 वर्ष थी, हम सब भारत जाने के लिए ट्रकों में बैठकर मुल्तान आये | वहाँ से आठवें दिन जाकर विभाजन वाली रेलगाड़ी में हमारा नंबर आया |

गोरखा फ़ौज का पहरा था लाहौर के पास ट्रेन को दंगाइयों ने रोकने की कोशिश की | हमने काफी मुश्किल का सामना करते हुए हर रुकावट को पार करते हुए, डर के साये में अमृतसर पहुंचे | वहाँ से हमें हिसार भेजा गया रिफ्यूजी कैंप में, कुछ दिनों बाद हम 3-4 परिवार हिसार के मोहल्ले डोगरान में एक ही मकान में रहे | उस मकान का दृश्य काफी दर्दनाक व भयावह था | किसी तरह हमने 1 साल वहाँ काटा |

एक साल बाद हमें नगीना तहसील फिरोज़पुर झिरका (मेवात) में जमीन एलॉट हुई | इस तरह हम वहीं रहने लगे | जहाँ फिर से मेरे दादा जी ने अनाज की दुकान खोल ली | मेरी विधवा माताजी ने दिल्ली से सिलाई का परीक्षण लिया और नगीना में सिलाई का काम करके हम तीनों भाई-बहनों को बड़ा किया |

1959 में मेरी नौकरी राजकीय महाविद्यालय हिसार में लग गई, 1972 में मेरा तबादला गुड़गाँव में हुआ | इस दौरान मैंने अपनी दोनों छोटी बहनों की शादी करवाई तथा अपना मकान बनवाया, मेरा स्वयं का परिवार चलाया ( मेरे दो पुत्र और पत्नि समेत) 1999 में, मैं सेवानिवृत्त हुआ | मेरी स्वावलंबी माता को मनाकर गुड़गाँव ले आया और नगीने से हमारा सम्बन्ध समाप्त हुआ | PC & 1803 एल्देको में अपने छोटे पुत्र के साथ रहता हूँ |

 

1947

 

Translated by Google 

Viral Sach – 1947 – My name is Deendayal Dudeja. I am 82 years old, I was born on 15 May 1939 in Tehsil Taunsa Sharif. My grandfather had a grain shop. Father went to district Dera Ghazi Khan along with his family in 1944 to start his business. My family consisted of my father, my mother, my two sisters and a younger brother. Father started a clothing business with his friends.

In the year 1947, when there was an atmosphere of partition of India and Pakistan, my father and younger brother (who was 4 years old) went to Tounsa Sharif to meet their grandparents. While coming back, the rioters looted the bus and brutally killed my father and younger brother. Hearing this news, my grandparents called me, my mother and my two sisters back from Dera Ghazi Khan to Taunsa Sharif.

In October 1947, when I was 8 years old, we all came to Multan in trucks to go to India. From there on the eighth day our number came in the divided train.

The rioters tried to stop the train near Lahore, which was guarded by the Gurkha army. We reached Amritsar under the shadow of fear, overcoming every obstacle facing a lot of difficulty. From there we were sent to the refugee camp in Hisar, after a few days we stayed with 3-4 families in the same house in Dogran locality of Hisar. The scene of that house was very painful and frightening. Somehow we spent 1 year there.

After one year we were allotted land in Nagina Tehsil Firozpur Jhirka (Mewat). In this way we started living there. Where again my grandfather opened a grain shop. My widowed mother took a tailoring test from Delhi and raised all three of us brothers and sisters by doing tailoring work in Nagina.

In 1959 I got a job in Government College, Hisar, in 1972 I was transferred to Gurgaon. During this time I got my two younger sisters married and got my house built, managed my own family (including my two sons and wife) In 1999, I retired. After persuading my self-supporting mother, he brought her to Gurgaon and ended our relationship with Nagine. I live in PC & 1803 Eldeco with my younger son.

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