1947 के विभाजन का दर्द – बुजुर्गों की जुबानी

1947 के विभाजन का दर्द – बुजुर्गों की जुबानी

गुरुग्राम, (मनप्रीत कौर ) : वैचारिक मंच के सदस्यों को मन से आभार व्यक्त करता हूँ | मेरा नाम भीमसेन मेहता है | मेरा जन्म 02-02-1938 को मंगडोठा गाँव, तहसील तौंसा जिला डेरा गाजी खान में हुआ था | विभाजन के समय मेरी आयु 9 वर्ष की थी | मैं चौथी कक्षा में पढ़ता था | पढ़ाई का माध्यम उर्दू था, सभी परिवार मिलजुल कर रहते थे | हिन्दू-मुसलमान में कोई भेदभाव नहीं करता था | सद्भाव पूर्ण वातावरण में गाँव में रहते थे | मैं, मेरे पिताजी, माता जी गाँव में रहते थे | मेरे चाचा रेलवे में कार्यरत थे और उनकी रिहायश अमृतसर में थी |

अगस्त 1947 को जब विभाजन हुआ, सभी हिन्दू परिवारों को गाँव छोड़ने की सलाह दी गई | गाँव मंगडोठा, तहसील तौंसा से हम सभी मिलिट्री की बस में, फिर रेलगाड़ी से गोरखा फ़ोर्स की देखरेख में अटारी पहुंचे | अटारी से शरीफ़ पुरा मोहल्ला, अमृतसर पहुंचे | वहाँ मेरे चाचा रहते थे | अमृतसर में मैंने चौथी कक्षा में दाखिला लिया और पढाई शुरू कर दी | 1950 में पलवल शिफ्ट हो गये और फिर गुड़गाँव में आ गये | शिक्षा ग्रहण करने के बाद बिजली बोर्ड में सेवा की | एग्जीक्यूटिव इंजिनियर के पद से सेवानिवृत्त हुआ हूँ | अब मेरी आयु 83 वर्ष की है और परिवार के साथ ख़ुशी से रहता हूँ |

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