1947 के विभाजन का दर्द – बुजुर्गों की जुबानी

1947 के विभाजन का दर्द – बुजुर्गों की जुबानी

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गुरुग्राम,(मनप्रीत कौर) : मेरा नाम कृष्ण लाल चोपड़ा पुत्र स्व. श्री हुकमचंद चोपड़ा एवं माता का नाम श्री मति उषा चोपड़ा है | मेरा जन्म 05-10-1939 को तोबा टेक सिंह जिला लायलपुर में हुआ था |
विभाजन के समय मेरी आयु 8 वर्ष की थी | मैंने भारत में आकर तीसरी कक्षा से शिक्षा आरम्भ की मैंने स्वयं अपने पांव पर खड़े होकर दसवीं की परीक्षा पास की | मैंने शिक्षा विभाग में सन 1959 में लिपिक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया | सेवा में कार्यरत होते हुए मैंने प्रभाकर और बी. ए. की परीक्षा पास की | सेवा में रहते हुए मैंने कर्मचारियों के पेंशन मामलों को तैयार करने में अधिक रूचि ली ताकि मैं कर्मचारियों के पेंशन मामलों को तैयार करने में अपनी सेवानिवृत्ति के पश्चात् उनकी सहायता कर सकूं |

मैं प्रभु का धन्यवादी हूँ कि जो अनुभव मैंने प्राप्त किया, उसका पूरा उपयोग करते हुए मैंने भिन्न – 2 विभागों के कर्मचारियों के पेंशन मामलों में अपना पूरा सहयोग दिया तथा विधवा औरतों के भी पेंशन मामलों में भी पूरी सहायता की | मुझे ऐसे मामलों को सुलझाने में, केवल प्रसन्नता नहीं होती जितनी की उनको आर्थिक लाभ पहुँचाने में होती है | मैं प्रभु से हमेशा यही प्रार्थना करता हूँ कि मुझे शक्ति और हिम्मत दे ताकि मैं ऐसे वृद्ध व्यक्तियों की सेवा करते हुए अपना समय देकर जीवन व्यतीत करूं |

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