राव तुलाराम की वीरता जानने को इतिहास पढ़े युवा पीढ़ी: नवीन गोयल

राव तुलाराम की वीरता जानने को इतिहास पढ़े युवा पीढ़ी: नवीन गोयल

Viral Sach : ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले अहीरवाल के जांबाज राव तुलाराम को उनकी जयंती पर पर्यावरण संरक्षण विभाग भाजपा हरियाणा प्रमुख नवीन गोयल ने नमन किया। साथ ही कहा कि युवा राव तुलाराम जी की वीरता जानने के लिए इतिहास को पढ़े। उनसे देश सेवा की प्रेरणा ले।

नवीन गोयल ने कहा कि पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक राव तुलाराम थे। उन्हें हरियाणा राज्य में राज नायक माना जाता है। अंग्रेजों से भारत को मुक्त कराने के उद्देश्य से एक युद्ध लडऩे के लिए मदद लेने के लिए उन्होंने भारत छोड़ा तथा ईरान और अफगानिस्तान के शासकों से मुलाकात की। 37 वर्ष की आयु में 23 सितंबर 1863 को काबुल में पेचिश से उनका निधन हो गया था।

इतिहास गवाह है कि 1857 की क्रांति में राव तुलाराम ने खुद को स्वतंत्र घोषित करते हुए राजा की उपाधि धारण कर ली थी। इस क्रांति में भागीदारी के कारण ब्रिटिश हुकूमत ने 1859 में राव तुलाराम की रियासत को जब्त कर लिया था। परंतु उनकी दोनों पत्नियों का संपत्ति पर अधिकार कायम रखा गया था। वर्ष 1877 में उनकी उपाधि उनके पुत्र राव युधिष्ठिर सिंह को अहीरवाल का मुखिया पदस्थ करके लौटा दी गयी।

उन्होंने नसीबपुर-नारनौल के मैदान में अंग्रेजों से वीरता से युद्ध भी किया। 23 सितम्बर 2001 को भारत सरकार ने उन्हें सम्मान देते हुए महाराजा राव तुलाराम की स्मृति में डाक टिकट जारी किया।

नवीन गोयल ने कहा कि ऐसे महान क्रांतिकारी के जीवन से हमारी युवा पीढ़ी को रूबरू होना चाहिए। उनके जीवन के एक-एक पल को कीमती समझकर उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में महापुरुषों के जीवन को विशेष तौर पर पढ़ाया जाए, ताकि बच्चे और युवा उनके जीवन से सीख ले सकें।

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